Delhi News: भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। देश के छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कॉर्पोरेट व्यापारियों तक अब हर जगह यूपीआई पेमेंट पूरी तरह आम हो चुका है। इसी बीच नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) व्यापारियों के लिए एक बेहद शानदार नियम ला रहा है।
इस नए क्रांतिकारी बदलाव को ‘वन साउंडबॉक्स रूल’ का नाम दिया गया है। अभी तक दुकानों के काउंटरों पर अलग-अलग कंपनियों जैसे गूगल पे, फोनपे और पेटीएम के कई साउंडबॉक्स रखे दिखते थे। इस अजीब स्थिति को खत्म करने के लिए नया सिस्टम जल्द लागू किया जाएगा।
अब केवल एक स्मार्ट डिवाइस से मिलेगी सभी पेमेंट की जानकारी
केंद्रीय नियामक संस्था एनपीसीआई इस समय एक खास तकनीक विकसित करने पर काम कर रही है। विशेषज्ञ इस आधुनिक प्रणाली को ‘इंटरऑपरेबल साउंडबॉक्स’ कह रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अब दुकानदारों को अलग-अलग कंपनियों के लिए कई डिवाइस खरीदने की कोई जरूरत नहीं होगी।
अब काउंटर पर सिर्फ एक ही स्मार्ट साउंडबॉक्स रखा जाएगा। यह इकलौता बॉक्स सभी डिजिटल ऐप्स से आने वाले पेमेंट की सटीक जानकारी और आवाज देगा। ग्राहक चाहे गूगल पे, फोनपे या पेटीएम में से किसी भी माध्यम से भुगतान करे, यह तुरंत कंफर्म कर देगा।
जानिए कैसे काम करेगी इंटरऑपरेबल साउंडबॉक्स की यह नई तकनीक
यह एडवांस सिस्टम बिल्कुल उसी तरह काम करेगा जैसे एक सिंगल क्यूआर कोड हर यूपीआई ऐप के साथ आसानी से कनेक्ट हो जाता है। वैसे ही यह नया साउंडबॉक्स भी सभी पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म से सीधे जुड़ा रहेगा। भुगतान पूरा होते ही उसकी आवाज इसी एक डिवाइस से आएगी।
इस तकनीक के आने से फिनटेक कंपनियों के बीच चल रही डिवाइस बेचने की रेस पूरी तरह खत्म हो जाएगी। कंपनियां अब बाजार में हार्डवेयर बेचने की बजाय अपनी मुख्य सॉफ्टवेयर तकनीक और ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। इससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
छोटे और बड़े व्यापारियों को मिलेंगे यह पांच बड़े फायदे
इस बड़े तकनीकी बदलाव से खासकर देश के छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुकानदारों को हर महीने कई कंपनियों को दिया जाने वाला भारी किराया और मेंटेनेंस खर्च अब नहीं देना पड़ेगा।
इसके साथ ही दुकानों का बिलिंग काउंटर बिल्कुल साफ, व्यवस्थित और सुंदर नजर आएगा। जगह की कमी का सामना करने वाले छोटे खोमचे और रेहड़ी पटरी वालों के लिए भी अब डिजिटल पेमेंट को अपनाना और इसे सुरक्षित रूप से संभालना काफी आसान हो जाएगा।
Author: Mohit

