देशभर में आवारा कुत्तों की अंधाधुंध हत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, क्या बेजुबानों को मारने का मिल गया लाइसेंस?

Delhi News: भारत में आवारा कुत्तों की बेकाबू हत्याओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है। ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नामक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने यह याचिका दाखिल की है। संस्था का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन अदालती आदेशों का गलत फायदा उठा रहा है।

याचिकाकर्ता एनजीओ ने शीर्ष अदालत से इस संवेदनशील मामले में तुरंत स्पष्टीकरण देने की गुहार लगाई है। संस्था ने कोर्ट से साफ करने का अनुरोध किया है कि उसके किसी भी पिछले दिशा-निर्देश में बेजुबान आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने की कोई अनुमति नहीं दी गई है।

इच्छामृत्यु के लिए एबीसी नियम का पालन जरूरी

एनजीओ का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार या आक्रामक कुत्तों को इच्छामृत्यु (इयुथेनेशिया) बेहद सीमित परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। इसके लिए पशु विशेषज्ञों की जांच और पुष्टि अनिवार्य होनी चाहिए। इस पूरी मानवीय प्रक्रिया में एबीसी नियम 2023 के प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए।

याचिका में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के हालिया बयान और खालसा कॉलेज परिसर से जबरन कुत्ते हटाए जाने की घटना का हवाला दिया गया है। संस्था ने गंभीर आरोप लगाया कि देश के विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी अब अदालती आदेशों को कुत्तों को खत्म करने का लाइसेंस मान रहे हैं।

अवैध रूप से जहर देने पर लगे पूर्ण रोक

संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को कड़े निर्देश जारी करने की मांग की है। याचिका के अनुसार स्थानीय निकायों को पाबंद किया जाए कि वे किसी भी आवारा कुत्ते को गैर-कानूनी तरीके से न तो मारें और न ही जहर देकर उनकी जान लें।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और जानवरों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े कानूनों को जमीनी स्तर पर बेहद सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। संस्था का तर्क है कि कानून के डर के बिना बेजुबान जीवों पर हो रहे इस तरह के क्रूर अत्याचारों को रोकना पूरी तरह असंभव है।

पंजाब में छिड़ा विवाद और रवीना टंडन की भावुक अपील

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में खतरनाक और जानलेवा कुत्तों को दर्द रहित इंजेक्शन देकर मारने का एक आदेश दिया था। इसके बाद 22 मई से पंजाब में आवारा कुत्तों को बड़े पैमाने पर पकड़ने का अभियान शुरू हुआ। खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर यह बड़ी जानकारी साझा की थी।

इस सरकारी अभियान के शुरू होते ही बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन ने मुख्यमंत्री मान से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की भावुक अपील की। रवीना ने कहा कि बेजुबानों के साथ हमारा बर्ताव ही यह तय करता है कि हम इंसानों के रूप में असलियत में कितने संवेदनशील और अच्छे हैं।

देशभर में लगातार बढ़ रहा है डॉग बाइट का खतरा

पूरे देश के अलग-अलग शहरों में आवारा कुत्तों के काटने और हमला करने की भयावह घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। डॉग बाइट के मामलों की वजह से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य खजाने पर भी एंटी-रेबीज दवाओं का अतिरिक्त आर्थिक बोझ तेजी से बढ़ रहा है।

सड़क पर चलने वाले मासूम बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर आए दिन इन हिंसक आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। नवंबर 2025 में इस गंभीर समस्या पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्थानीय प्रशासन को नसबंदी करने और शेल्टर होम बनाने के निर्देश जारी किए थे।

Author: Adv Anuradha Rajput

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