दिल्ली में बिजली हुई महंगी: FPPAS अधिभार में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

Delhi News: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। ईंधन और कोयले की कीमतों में भारी उछाल के कारण बिजली उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसे देखते हुए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

आयोग के नए आदेश के बाद, दिल्ली की प्रमुख वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं से अब पहले से अधिक अधिभार वसूल सकेंगी। अब तक यह दर 10% थी, जिसमें अब बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव से शहर के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में 6% से लेकर 7.94% तक की वृद्धि होना तय है, जो महंगाई के दौर में एक अतिरिक्त झटका है।

कंपनियों के अनुसार अधिभार का विवरण

DERC के ताजा निर्देशों के मुताबिक, अलग-अलग वितरण कंपनियों के लिए अधिभार की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। बीआरपीएल (BRPL) अपने उपभोक्ताओं से अब अतिरिक्त 7.94% अधिभार वसूल सकेगी। वहीं, बीवाईपीएल (BYPL) के लिए यह दर 7.43% निर्धारित की गई है, जबकि टीपीडीडीएल (TPDDL) के उपभोक्ता अब अपने बिल पर अतिरिक्त 6% अधिभार का भुगतान करेंगे।

सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत

बढ़ती बिजली कीमतों के बीच दिल्ली सरकार की ओर से राहत की खबर भी है। सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली में 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 100% सब्सिडी मिलती है, जबकि 201 से 400 यूनिट तक के उपभोक्ताओं को 50% सब्सिडी जारी रहेगी। इससे कमजोर वर्गों को काफी सुरक्षा मिलेगी।

मासिक समीक्षा की नई व्यवस्था

अब तक FPPAS की समीक्षा तिमाही आधार पर की जाती थी, लेकिन मार्च 2026 के बाद इसे बदलकर मासिक कर दिया गया है। फिलहाल, यह नई बढ़ी हुई दरें केवल एक महीने के लिए प्रभावी की गई हैं। DERC की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत के आधार पर हर महीने इसकी समीक्षा की जाएगी।

महंगाई का मुख्य कारण

बिजली की कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले और ईंधन की आपूर्ति में आई बाधा है। कोयले के आयात और उसके परिवहन की बढ़ती लागत का सीधा असर बिजली खरीद समझौते की दरों पर पड़ा है। जब बिजली कंपनियों को महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है, तो उसका भार अंततः उपभोक्ताओं के बिल में समायोजन अधिभार के रूप में जोड़ा जाता है।

Author: Gaurav Malhotra

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