Haridwar News: हिंदू धर्म में दैनिक पूजा-पाठ और आरती को ईश्वर की साधना का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। अधिकतर लोग सुबह-शाम अपने घरों में पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की आरती भी करते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में कुछ ऐसी बड़ी गलतियां हो जाती हैं, जिससे पूजा का फल नहीं मिलता।
शास्त्रों के अनुसार सबसे बड़ी और आम गलती आरती समाप्त होने के तुरंत बाद बिना नियम के वहां से उठ जाना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरती केवल एक सामान्य अनुष्ठान नहीं है। यह असल में भगवान के प्रति संपूर्ण समर्पण और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे उत्तम माध्यम है।
जानिए आरती की लौ को सिर पर ग्रहण करना क्यों है जरूरी
सनातन धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि आरती पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को दिव्य लौ पर अपने दोनों हाथों को फेरकर माथे और आंखों से लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस प्रक्रिया से आरती के माध्यम से उत्पन्न हुई सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा सीधे आप तक पहुंचती है।
कई लोग घर या मंदिर में आरती समाप्त होते ही जल्दबाजी में वहां से उठकर तुरंत चले जाते हैं। वे भगवान की इस पवित्र ज्योति की लौ को ग्रहण नहीं करते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे पूजा की पूरी प्रक्रिया को अधूरा छोड़ने की एक गंभीर भूल माना गया है।
आरती संपन्न होने के तुरंत बाद अवश्य करें ये जरूरी काम
आरती पूरी हो जाने के पश्चात कुछ क्षण के लिए आंखें बंद करके भगवान का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद अपने जीवन की सुख-शांति के लिए ईश्वर से सच्चे मन से प्रार्थना करें और चरणामृत व प्रसाद ग्रहण करें। इसके साथ ही पूजा के दीपक को हमेशा एक सुरक्षित और उचित स्थान पर ही रखें।
शास्त्रों के अनुसार आरती के बाद प्रभु का स्मरण करते हुए पूरे परिवार और समाज के कल्याण की कामना करनी चाहिए। ऐसा करने से आपकी नियमित पूजा का आध्यात्मिक महत्व कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
केवल पूजा करना ही नहीं बल्कि नियमों का पालन भी है आवश्यक
हमारे धर्मशास्त्रों में केवल पूजा करने को ही पर्याप्त नहीं माना गया है, बल्कि उसे सही विधि और पूर्ण श्रद्धा के साथ संपन्न करना जरूरी बताया गया है। इसलिए अगली बार जब भी आप आरती करें, तो जल्दबाजी करने के बजाय कुछ पल रुककर आभार जताएं और आरती की लौ का सम्मान करें।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


