रविवार को अलग-अलग प्रहर में सूर्य पूजा का क्या है महत्व? जानें अर्घ्य देने का सही समय और नियम

Delhi News: सनातन धर्म में सूर्य को देव का दर्जा प्राप्त है। पंचदेवों में सूर्य ही एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो साक्षात दिखाई देते हैं। रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव को समर्पित है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है।

रविवार के दिन सुबह, दोपहर और शाम तीनों प्रहर में सूर्य देव की उपासना की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को भगवान सूर्य को जल चढ़ाने से समाज में यश, कीर्ति, सुख-सौभाग्य और उच्च प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता है कि रविवार की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य भक्तों को आरोग्यता और सफलता का वरदान देते हैं। ऋग्वेद के मुताबिक, सूर्योदय होने के ठीक 1 घंटे के भीतर ही सूर्य को अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है।

तीनों प्रहर की पूजा का अलग और विशेष महत्व

सूर्योदय के समय सूर्य देव बेहद शीतल होते हैं। इस समय उनकी किरणें शरीर पर पड़ने से कई गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। सुबह सूर्य देव की पूजा करने से शारीरिक ऊर्जा, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता का तेजी से संचार होता है।

रविवार को दोपहर के समय सूर्य पूजा में मंत्रों का जाप करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इस दौरान ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने से आध्यात्मिक शुद्धि होती है। दोपहर की पूजा से व्यक्ति का आंतरिक तेज और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

वहीं संध्याकाल में ढलते हुए सूर्य यानी ‘प्रत्यूषा’ की पूजा की जाती है। यह पूजा भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए होती है। शाम को सूर्य देव को नमन करने से दिनभर की मानसिक और शारीरिक नकारात्मकता पूरी तरह दूर हो जाती है।

ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में सूर्य देव का स्थान

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को सभी नवग्रहों का राजा माना गया है। प्राचीन काल से ही सुबह के समय सूर्य पूजन की परंपरा चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार, न केवल मनुष्य बल्कि स्वयं देवता भी सूर्य आराधना के बाद ही दिनचर्या शुरू करते थे।

रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले सूर्य देव की विशेष पूजा की थी। इसके अलावा, भविष्य पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा का सबसे बड़ा महत्व विस्तार से समझाया था।

कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण के पुत्र सांब का गंभीर कुष्ठ रोग सूर्य देव की कठिन उपासना से ही पूरी तरह ठीक हुआ था। इसी वजह से सूर्य को आरोग्य का देवता भी कहा जाता है, जिनकी पूजा हर कष्ट को हर लेती है।

Author: Pandit Balkrishan Sharma

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