साल की सबसे बड़ी निर्जला एकादशी पर पानी से जुड़ी ये एक भूल, खाली कर सकती है आपकी तिजोरी

Lucknow News: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशी व्रतों में सबसे सर्वोत्तम और अधिक पुण्य फल देने वाला माना गया है। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह पवित्र व्रत रखा जाता है। इस साल 25 जून को निर्जला एकादशी का महाव्रत रखा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का अकेले व्रत रखने से साल भर की सभी एकादशियों का फल मिल जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखने से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्तों के जीवन से सभी कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।

ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में पड़ने के कारण इस पावन तिथि पर जलदान का विशेष महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है। इस तपती गर्मी में किसी प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य का काम माना जाता है। हिंदू शास्त्रों में जलदान को सबसे बड़ा और सर्वोत्तम महादान कहा गया है।

निर्जला एकादशी पर जलदान का अचूक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जल का दान करता है, उसे देवताओं और पितरों दोनों का आशीर्वाद मिलता है। जल को साक्षात जीवन का आधार माना गया है। इस दिन राहगीरों, जरूरतमंदों और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने से अक्षय पुण्य मिलता है।

इस पावन दिन पर देश भर में जगह-जगह प्याऊ लगाने और मीठे पानी का वितरण करने की प्राचीन परंपरा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार निर्जला एकादशी पर पानी से जुड़ी कुछ गलतियां आपके सुखी परिवार पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए इस दिन पानी की बर्बादी करने से बचना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के नियमों के मुताबिक निर्जला एकादशी के दिन जल का विशेष सम्मान करना चाहिए। इस दिन घर में रखी टूटी हुई बाल्टी, खाली घड़े, गंदे पानी के बर्तन या किसी भी तरह के अनुपयोगी जल पात्रों को तुरंत घर से बाहर निकाल देना चाहिए। इन्हें रखना अशुभ होता है।

जल तत्व का सीधा संबंध है चंद्रमा से

वास्तु विज्ञान में जल तत्व को हमेशा शुद्धता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। घर में जल का उचित संतुलन और उसकी सही दिशा आपके पूरे पारिवारिक वातावरण को प्रभावित करती है। इन बर्तनों को घर में रखने से भारी नकारात्मकता पैदा होती है।

ज्योतिष शास्त्र में जल तत्व का सीधा संबंध सीधे तौर पर चंद्रमा से जोड़ा जाता है। चंद्रमा को मुख्य रूप से मनुष्य के मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का स्वामी ग्रह माना गया है। इसी वजह से जल की स्वच्छता और सम्मान को सीधे तौर पर मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है।

Author: Pandit Balkrishan Sharma

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