चेस्टर हिल प्रोजेक्ट पर हाई कोर्ट सख्त, बेनामी संपत्तियों और धारा-118 उल्लंघन मामले में मांगा जवाब

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सोलन के चर्चित चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े बेनामी संपत्तियों और धारा-118 के कथित उल्लंघन मामले में राज्य सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सीबीआई और ईडी से जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने याचिका के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों का प्रारंभिक अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी पक्षों से विस्तृत जवाब तलब किया। इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय एजेंसियां भी प्रतिवादी बनाई गई हैं।

कई वरिष्ठ अधिकारी और एजेंसियां पक्षकार

याचिका अधिवक्ता विनय शर्मा ने दायर की है। इसमें मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, उपायुक्त सोलन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला, नगर निगम आयुक्त सोलन, सीबीआई, ईडी और कार्मिक मंत्रालय सहित कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि सौदों में बेनामी संपत्तियों का उपयोग किया गया। दावा किया गया है कि एक कृषक की घोषित आय सीमित थी, लेकिन कुछ वर्षों में उसकी आय में असामान्य वृद्धि दिखाई गई। इसके बाद बड़े पैमाने पर भूमि खरीद की गई।

275 बीघा जमीन खरीद पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता के अनुसार संबंधित कृषक ने अपनी पत्नी और दो बहनों के नाम पर लगभग 275 बीघा भूमि खरीदी। यह जमीन कसौली क्षेत्र की तीन अलग-अलग जगहों पर ली गई। मामले की जांच के दौरान एसडीएम स्तर पर आयकर रिटर्न के आंकड़ों ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।

दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक कृषक की औसत वार्षिक आय करीब छह लाख रुपये थी। बाद के वर्षों में यह बढ़कर लगभग 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष बताई गई। याचिका में कहा गया है कि इतनी आय के आधार पर इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीदना आर्थिक रूप से संभव नहीं दिखता।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने बैंक से करीब आठ करोड़ रुपये का ऋण लिया और निर्धारित अवधि से पहले उसका भुगतान भी कर दिया। इन वित्तीय लेनदेन को लेकर पारदर्शिता और धन के स्रोत पर सवाल उठाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

धारा-118 अनुमति को लेकर भी विवाद

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि परियोजना से जुड़े लोगों ने कृषकों के नाम पर धारा-118 की अनुमति प्राप्त की और उसके आधार पर निर्माण कार्य शुरू किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस प्रक्रिया का उपयोग परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

याचिका में तत्कालीन राजस्व प्रशासन से जुड़े निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि परियोजना से संबंधित कुछ फैसले नियमों के विपरीत लिए गए। साथ ही कुछ भूमि सौदों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का दावा किया गया है। अदालत ने मामले में सीबीआई और ईडी को भी नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।

Author: Sunita Gupta

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