शिमला में बाहरी कामगारों के लिए कड़े नियम लागू, बिना पुलिस वेरिफिकेशन काम दिया तो सीधे जेल जाएंगे मालिक

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप ने जिले में रह रहे सभी बाहरी कामगारों और प्रवासियों का पुलिस पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।

प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या आपराधिक वारदात को रोकने के लिए यह सख्त आदेश जारी किया है। नए नियमों के तहत अब रेहड़ी-फड़ी धारकों, फेरी वालों और अस्थायी श्रमिकों को नजदीकी थाने में पंजीकरण कराना होगा।

कोई भी नियोक्ता, ठेकेदार या स्थानीय व्यापारी अब किसी भी बाहरी मजदूर को काम पर नहीं रख सकेगा। काम देने से पहले संबंधित मजदूर का स्थानीय पुलिस स्टेशन में पूरा विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो जमा कराना अब बेहद जरूरी होगा।

इसके साथ ही काम की तलाश में शिमला आने वाले हर बाहरी व्यक्ति को अपनी आमद दर्ज करानी होगी। संबंधित थाना प्रभारी को सूचना दिए बिना कोई भी व्यक्ति जिले में स्वरोजगार या किसी भी प्रकार का व्यापार शुरू नहीं कर पाएगा।

बीएनएसएस की धारा 163 के तहत मालिकों को मिले सख्त निर्देश

जिला दंडाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत ये कड़े निर्देश जारी किए हैं। बाहरी कामगारों को रखने वाले उद्यमियों, कारोबारियों, ठेकेदारों और किसानों को इस नियम का सख्ती से पालन करना होगा।

मकान मालिकों के लिए भी अपने किरायेदारों की पहचान और उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत प्रवासियों का वेरिफिकेशन ऑफ एंटीसिडेंट कराया जाएगा ताकि उनके पुराने रिकॉर्ड और चरित्र का पूरा सच सामने आ सके।

यह वेरिफिकेशन रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति के मूल गृह क्षेत्र के पुलिस थाने से तैयार करवाई जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि जिले की सीमा के भीतर बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किसी भी प्रवासी को रोजगार कमाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इन नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रवासियों, उनके नियोक्ताओं और मकान मालिकों पर सीधी कानूनी गाज गिरेगी। जिला प्रशासन ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाएगा।

अपराधिक वारदातों की त्वरित जांच के लिए उठाया यह बड़ा कदम

प्रशासन की ओर से जारी यह विशेष सुरक्षा आदेश जिले में आगामी 31 जुलाई, 2026 तक पूरी तरह लागू रहेगा। जिला दंडाधिकारी ने बताया कि शिमला में हर साल बहुत बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग रोजी-रोटी कमाने आते हैं।

यह अस्थायी श्रमिक निर्माण स्थलों या किराये के मकानों में रहते हैं। जिले में कोई भी अप्रिय वारदात होने पर पुलिस को प्रवासियों के रिकॉर्ड न होने से जांच में काफी दिक्कत आती थी। इसी परेशानी को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

Author: Sunita Gupta

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