Delhi News: देश के युवाओं में मोटी सैलरी पाने के बावजूद एक नया संकट तेजी से बढ़ रहा है। महीने की पहली तारीख को बैंक अकाउंट में पैसे आते ही खुशी होती है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पूरा खाता खाली नजर आने लगता है। इस गंभीर समस्या को विशेषज्ञ फाइनेंशियल एंग्जायटी कह रहे हैं।
मशहूर कवि नीलोत्पल मृणाल की पंक्तियां आज के युवाओं की इस हालत पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। युवा एक अच्छी नौकरी के चक्कर में अपनी मानसिक शांति खो रहे हैं। ठीक-ठाक कमाई होने के बाद भी आज का पढ़ा-लिखा युवा भविष्य के लिए बिल्कुल बचत नहीं कर पा रहा है।
सोशल मीडिया की दिखावे वाली दुनिया ने बिगाड़ा बजट
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. विभा नागर कहती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की आय जरूर बढ़ी है। लेकिन उनके फिजूलखर्च उससे भी ज्यादा तेज गति से बढ़े हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाली लग्जरी लाइफस्टाइल ने युवाओं पर एक अलग तरह का मानसिक दबाव बना दिया है।
आजकल नए गैजेट्स, महंगे कैफे और ब्रांडेड कपड़ों के चक्कर में युवा अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा तुरंत गंवा देते हैं। ट्रेंड्स के साथ चलने की यह अंधी होड़ युवाओं के बजट को पूरी तरह तबाह कर रही है। इससे उनके भीतर आर्थिक असुरक्षा की भावना पनप रही है।
नौकरीपेशा युवा अरुण राणा बताते हैं कि बढ़ती आकांक्षाओं और आर्थिक अस्थिरता के कारण मानसिक तनाव बहुत बढ़ गया है। नौकरी की अनिश्चितता और भविष्य की चिंता युवाओं को चैन से सोने नहीं देती। यह लगातार बढ़ता आर्थिक दबाव सीधे उनके आत्मविश्वास को बुरी तरह चोट पहुंचा रहा है।
महंगाई की चौतरफा मार से बचत करना बना बड़ी चुनौती
आज के दौर में केवल अच्छी कमाई होना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं है। खाद्य पदार्थों, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने मध्यवर्गीय युवाओं की कमर तोड़ दी है। किराया, यात्रा और मोबाइल बिल जैसे जरूरी खर्च ही आधी से ज्यादा सैलरी खा जाते हैं।
युवा आदित्य और सिमरन कपूर का भी यही मानना है। वे कहते हैं कि सोशल लाइफ और अचानक आने वाले खर्चों को मैनेज करना बहुत कठिन हो गया है। जितनी तेजी से युवाओं की सैलरी बढ़ती है, उतनी ही रफ्तार से रोजमर्रा के घरेलू खर्च भी बढ़ जाते हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. अंजू खोकर के अनुसार इस आर्थिक दबाव का सीधा असर अब मानसिक स्वास्थ्य पर साफ दिख रहा है। लगातार पैसों की तंगी युवाओं में बेचैनी का कारण बन रही है। इस समस्या से बचने के लिए युवाओं को आज ही से बजट बनाकर चलना बेहद जरूरी है।
आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य के लिए अनावश्यक खरीदारी से बचना चाहिए। युवाओं को हर महीने नियमित रूप से छोटी बचत और सही निवेश की आदत डालनी होगी। संतुलित सोच और सही वित्तीय योजना ही युवाओं को इस गंभीर फाइनेंशियल एंग्जायटी से हमेशा के लिए बचा सकती है।
Author: Karuna Sen


