सोलन नगर निगम में भाजपा का बड़ा उलटफेर, कांग्रेस का गढ़ ढहा, पूर्व महापौर भी नहीं बचा सकीं अपनी सीट

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनावों में भाजपा ने सोलन में बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया है। 17 वार्डों वाले नगर निगम सोलन में भाजपा ने 10 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस छह सीटों तक सिमट गई, जबकि एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरणों को रोचक बना दिया।

नगर निगम सोलन के गठन के बाद हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर सत्ता संभाली थी। उस समय कांग्रेस ने महापौर और उपमहापौर दोनों पदों पर कब्जा किया था। लेकिन दूसरे चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया और नगर निगम की सत्ता कांग्रेस के हाथों से निकल गई।

पूर्व महापौरों को जनता ने नहीं दिया मौका

इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू कांग्रेस की दोनों पूर्व महापौरों की हार रही। कांग्रेस ने जिन नेताओं के अनुभव के दम पर वापसी की उम्मीद लगाई थी, उन्हें मतदाताओं ने नकार दिया। इससे न केवल पार्टी को राजनीतिक झटका लगा बल्कि नगर निगम की सत्ता भी उसके हाथ से फिसल गई।

वर्ष 2020-21 में कांग्रेस ने नगर निगम सोलन के पहले चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद उषा शर्मा और पूनम ग्रोवर को महापौर पद की जिम्मेदारी मिली थी। इस बार दोनों नेताओं की हार ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

कांग्रेस ने चुनाव में झोंकी थी पूरी ताकत

सोलन नगर निगम चुनाव कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था। पार्टी ने अपनी आधी कैबिनेट को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी थी। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को चुनाव प्रभारी बनाया गया था। कई वरिष्ठ नेताओं ने भी चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल और उनके पुत्र कर्नल संजय शांडिल की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी मानी जा रही थी। इसके बावजूद कांग्रेस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। परिणाम आने के बाद पार्टी को नगर निगम स्तर पर बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है।

भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत गढ़ में लगाई सेंध

भाजपा की जीत को सोलन में कांग्रेस के मजबूत आधार में बड़ी राजनीतिक सेंध माना जा रहा है। पार्टी ने कई महत्वपूर्ण वार्डों में बढ़त बनाकर बहुमत का आंकड़ा पार किया। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया कि मतदाताओं ने इस बार बदलाव के पक्ष में मतदान किया और भाजपा पर भरोसा जताया।

17 वार्डों वाले नगर निगम में भाजपा ने 10 सीटें जीतीं। कांग्रेस को छह सीटों पर सफलता मिली। वार्ड नंबर-3 से गौरव राजपूत निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी रहे। अब नगर निगम में महापौर और उपमहापौर के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के पास बहुमत होने से उसका पलड़ा मजबूत माना जा रहा है।

इन वार्डों में भाजपा ने दर्ज की अहम जीत

भाजपा ने वार्ड 1, 2, 4, 5, 6, 8, 11, 12, 15 और 16 में जीत दर्ज की। इनमें कई वार्ड ऐसे रहे जहां मुकाबला बेहद करीबी रहा। वार्ड 8 में भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र ने कांग्रेस की पूनम को बेहद कम अंतर से हराकर महत्वपूर्ण जीत हासिल की।

कांग्रेस ने वार्ड 7, 9, 10, 13, 14 और 17 में सफलता हासिल की। वार्ड 14 से सुलक्षणा ने सबसे बड़ी जीतों में से एक दर्ज की। वहीं वार्ड 17 में अरुणा ने कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर बनाए रखा। इसके बावजूद पार्टी बहुमत से काफी दूर रह गई।

Author: Sunita Gupta

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