देश में पेट्रोल-डीजल की भारी सप्लाई के बीच सरकार की बड़ी चेतावनी, गलत इस्तेमाल करने वालों पर अब होगी सख्त कार्रवाई

Delhi News: केंद्र सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिया है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई जरूरत से कहीं अधिक हो रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए जनता को किसी भी तरह की किल्लत या अफवाह से आशंकित होने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

घरेलू ईंधन का व्यावसायिक इस्तेमाल करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

सरकार ने साफ कर दिया है कि रियायती दरों पर मिलने वाले घरेलू ईंधन का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों के लिए ही होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति या संस्थान इस ईंधन का इस्तेमाल औद्योगिक या व्यावसायिक गतिविधियों में करता पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ कानूनन सख्त एक्शन लिया जाएगा। मंत्रालय इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगा।

तेल शोधन के क्षेत्र में भारत आज विश्व पटल पर अपनी एक मजबूत पहचान बना चुका है। वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल शोधक देश है। देश की कुल 22 रिफाइनरियां हर साल लगभग 25.81 करोड़ टन कच्चे तेल को साफ करने की क्षमता रखती हैं, जो हमारी ऊर्जा जरूरतों के लिए पर्याप्त है।

जरूरत से ज्यादा उत्पादन और शेष तेल का होगा अब निर्यात

आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कुल वार्षिक खपत 24.32 करोड़ टन है। चूंकि हमारा उत्पादन 25.81 करोड़ टन है, इसलिए यह घरेलू मांग से काफी अधिक है। घरेलू जरूरतों को पूरी तरह सुरक्षित करने के बाद, बचे हुए अतिरिक्त तेल को दूसरे देशों में निर्यात करने की योजना है।

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियां बड़ा वित्तीय बोझ उठा रही हैं। सरकार ने खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियों के बावजूद, कंपनियां प्रतिदिन करीब 550 करोड़ रुपये का घाटा सह रही हैं। हालांकि, वैश्विक स्थितियों और बाजार की गहन समीक्षा करने के बाद ही अब तेल की कीमतों में आंशिक बदलाव किए जा रहे हैं।

Author: Gaurav Malhotra

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