हिमाचल में ‘चिट्टे’ पर सबसे बड़ा प्रहार: क्या अब छात्रों का डोप टेस्ट बचाएगा युवाओं का भविष्य?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के बढ़ते प्रकोप को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों का हर साल ‘चिट्टा टेस्ट’ होगा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस नई व्यवस्था का ऐलान किया। सरकार का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं का पुनर्वास करना है।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अगले महीने से प्रोफेशनल कोर्सेज के छात्रों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य हो जाएगा। यदि कोई छात्र टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे कॉलेज से बाहर नहीं निकाला जाएगा। इसके बजाय सरकार उस छात्र का इलाज कराएगी और उसे मुख्यधारा में वापस लाएगी। सरकार का मानना है कि नशा केवल अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट है। पुलिस भर्ती के बाद अब अन्य सरकारी नौकरियों में भी यह टेस्ट अनिवार्य होगा।

नशा तस्करों की काली कमाई पर चलेगा बुलडोजर

चिट्टे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुक्खू सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि नशे के कारोबार से बनाई गई संपत्तियों को पूरी तरह नष्ट किया जाएगा। अब तक 123 ऐसे सरकारी कर्मचारियों की पहचान की गई है, जो नशे के नेटवर्क में शामिल थे। इनमें से 31 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं। शेष कर्मचारियों पर भी जल्द ही कड़ी कार्रवाई होगी।

राज्य सरकार ने प्रदेश की 234 पंचायतों को नशे की स्थिति के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटा है। पुलिस विभाग इन क्षेत्रों पर पैनी नजर रख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 12 हजार लोग नशे से जुड़े पाए गए हैं। एनडीपीएस एक्ट के तहत 6811 मामले दर्ज कर 10,357 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 45 किलो हेरोइन बरामद की है और 174 बड़े तस्कर जेल भेजे गए हैं।

एक जून से शुरू होगा ‘चिट्टा मुक्त अभियान’ का दूसरा चरण

प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार एक जून से 20 अगस्त तक विशेष अभियान चलाएगी। इस ‘चिट्टा मुक्त अभियान’ के दूसरे चरण में स्कूलों और कॉलेजों में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे। सभी जिलों के उपायुक्तों को कम से कम 10 शिक्षण संस्थानों और 10 पंचायतों का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं। खुद मुख्यमंत्री भी पूरे प्रदेश में आयोजित होने वाले वॉकथॉन में हिस्सा लेकर युवाओं को जागरूक करेंगे।

नशा पीड़ितों के इलाज के लिए सरकार मशोबरा में लड़कियों के लिए विशेष डी-एडिक्शन सेंटर खोलेगी। दूसरा बड़ा केंद्र टांडा मेडिकल कॉलेज में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दवा विक्रेताओं और फार्मा कंपनियों को भी कड़ी चेतावनी दी है। यदि कोई भी फार्मासिस्ट या कंपनी नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री में शामिल मिली, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। सरकार ने पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट को भी अब और अधिक प्रभावी बना दिया है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories