Himachal Pradesh News: चम्बा जिले की मंगला पंचायत में पंचायत चुनाव के दौरान मतदाता सूची की गड़बड़ी ने कई लोगों को मतदान से रोक दिया। विकास खंड मैहला के कई मतदाता वोटर आईडी लेकर बूथ पहुंचे, लेकिन सूची में नाम न मिलने पर उन्हें बिना वोट डाले लौटना पड़ा।
मंगला पंचायत में मतदान के दिन कई मतदाता पूरे उत्साह से पोलिंग बूथ पहुंचे थे। उनका दावा है कि वे इस क्षेत्र के पुराने और स्थायी निवासी हैं। इसके बावजूद मतदाता सूची में उनके नाम नहीं मिले। कुछ लोगों के नाम, पिता का नाम और पता गलत दर्ज होने की बात भी सामने आई।
मनोज कुमार, राकेश कुमार और सुरेश सहित कई मतदाताओं ने इस गड़बड़ी पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि वे वोटर आईडी कार्ड लेकर मतदान केंद्र पहुंचे थे। बूथ पर सूची देखी गई तो नाम गायब निकले। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग बूथों पर नाम तलाशा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
नाम-पते की गलती से रुका मतदान
लोगों का कहना है कि सिर्फ नाम गायब होना ही समस्या नहीं थी। कई मतदाताओं के पिता का नाम गलत लिखा था। कुछ के पते भी सही नहीं थे। इसी आधार पर उन्हें मतदान करने से रोक दिया गया। मतदाताओं ने इसे प्रशासनिक स्तर की गंभीर चूक बताया है।
मतदाताओं ने सवाल उठाया कि जब वे पिछले विधानसभा चुनावों में वोट डाल चुके हैं, तो पंचायत चुनाव की सूची से उनके नाम कैसे हट गए। उनका कहना है कि उन्होंने क्षेत्र नहीं बदला और न ही कोई ऐसी जानकारी दी, जिससे उनका नाम हटाया जा सके। इस कारण लोगों में भारी रोष दिखा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगला पंचायत में करीब 40 से 45 मतदाताओं के नाम सूची से गायब बताए गए। इन लोगों को मतदान केंद्र से खाली हाथ लौटना पड़ा। लोकतंत्र के महापर्व में वोट न डाल पाने से कई मतदाता निराश दिखे। कुछ बुजुर्ग मतदाताओं ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
गुस्साए मतदाताओं ने प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ गलती मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे लापरवाही या साजिश भी हो सकती है। मतदाताओं ने पूछा कि आखिर नाम किस आधार पर काटे गए।
मतदाताओं का कहना है कि सरकार और चुनाव आयोग लगातार लोगों से ज्यादा मतदान की अपील करते हैं। दूसरी ओर, ऐसी गड़बड़ियां लोगों को उनके अधिकार से वंचित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि वोट डालना नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए सूची की शुद्धता सबसे जरूरी जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के प्रकाशन और जांच की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। पंचायत स्तर पर सूची की समय रहते जांच होनी चाहिए थी। अगर नामों में गलती थी, तो सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था। मतदान के दिन ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए थी।
मंगला पंचायत का मामला पंचायत चुनावों में व्यवस्था की तैयारी पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण मतदाताओं का कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नाम कब, क्यों और कैसे हटे। साथ ही गलत नाम-पते दर्ज होने की जिम्मेदारी तय कर भविष्य में ऐसी चूक रोकनी चाहिए।
Author: Sunita Gupta

