Madhya Pradesh News: राजनीति में कब कौन सी पुरानी फाइल खुल जाए और कौन सा आरोप नया बनकर सामने आ जाए, कहा नहीं जा सकता। मध्य प्रदेश में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी इन दिनों एक ऐसे ही सियासी भंवर में फंसे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के साथ कथित सौदेबाजी का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। आरोप बेहद संगीन हैं, सत्ता पक्ष से साठगांठ कर टिकट बेचने के। इस पूरे विवाद में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय का नाम सबसे ऊपर उछाला गया। अब अस्तेय ने खुद सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है और इन तमाम आरोपों को बहुजन आंदोलन को बदनाम करने की एक गहरी साजिश करार दिया है।
बीजेपी से सौदेबाजी के आरोपों पर क्या बोले अस्तेय?
विवाद के तूल पकड़ने के बाद सुनील अस्तेय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अस्तेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह आजाद समाज पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। वह ऐसे किसी भी भ्रामक और बेबुनियाद तथ्य को स्वीकार नहीं करते। अस्तेय का मानना है कि यह पूरा विवाद आंबेडकरी विचारधारा को कुचलने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल और उनके राजनीतिक विरोधी अपने इशारों पर पुराने झूठे मुकदमों की आड़ लेकर अफवाहें फैला रहे हैं।
‘खून-पसीने से खड़ा किया संगठन, विरोधियों में है घबराहट’
सुनील अस्तेय ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्होंने मध्य प्रदेश में इस संगठन को अपने खून-पसीने से सींचा है। बहुजन समाज की आवाज को मजबूती देने का काम किया है। अस्तेय कहते हैं कि उन पर निराधार आरोप लगाना केवल उनकी व्यक्तिगत छवि धूमिल करने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उनके वैचारिक मिशन पर एक बड़ा हमला है। अस्तेय दावा करते हैं कि भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की लगातार बढ़ती ताकत से विरोधी पूरी तरह घबरा गए हैं। इसी घबराहट में कुछ बिकाऊ और स्वार्थी तत्वों का सहारा लेकर इस बड़े आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।
क्या था नरोत्तम मिश्रा से जुड़ा पूरा विवाद?
इस पूरी कहानी की जड़ें 2023 के विधानसभा चुनावों से जुड़ी हैं। उस वक्त पार्टी के भीतर ही टिकट बंटवारे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय और भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरसिया पर सीधा आरोप लगा था। कहा गया कि इन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ टिकटों का सौदा किया है। इस पूरे मामले में वर्तमान प्रदेश प्रभारी विनोद आंबेडकर का नाम भी चर्चा में आया था। उस वक्त विवाद इतना गहरा गया था कि इन सभी नेताओं को उनके पदों से तत्काल हटा दिया गया। अब ऐसी सुगबुगाहट है कि इन नेताओं को संगठन में धीरे-धीरे दोबारा जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इसी सुगबुगाहट ने पुराने आरोपों की आग को फिर से हवा दे दी है। हालांकि, अस्तेय साफ कहते हैं कि बहुजन समाज पूरी तरह जागरूक है और ऐसी झूठी अफवाहों से उनका संघर्ष कभी नहीं रुकेगा।


