New Delhi News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद देश का सियासी पारा गरमा गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस अप्रत्याशित जीत पर गंभीर सवाल उठाते हुए ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया है। केजरीवाल ने भाजपा की इस सफलता को तर्कों के आधार पर कटघरे में खड़ा करते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
केजरीवाल का 2015 और 2016 के आंकड़ों से तुलनात्मक हमला
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने पोस्ट में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए लिखा कि जिस दौर में ‘मोदी लहर’ अपने चरम पर थी, तब भी भाजपा दिल्ली और बंगाल में बड़ा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि 2015 के दिल्ली चुनाव और 2016 के बंगाल चुनाव में भाजपा को महज 3-3 सीटें ही मिली थीं। केजरीवाल ने सवाल किया कि अब, जबकि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट के दावे किए जा रहे हैं, तब भाजपा ने इतनी प्रचंड जीत कैसे हासिल कर ली?
चुनावी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर विपक्षी दलों की एकजुटता
केजरीवाल के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी सहित कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनावी मशीनरी और प्रक्रिया पर संदेह जताया है। गौरतलब है कि बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा ने 294 सीटों में से 200 से अधिक पर जीत दर्ज कर ममता बनर्जी के 15 साल पुराने शासन का अंत किया है। विपक्ष अब इस बड़ी जीत के पीछे के कारणों और चुनावी निष्पक्षता की जांच की मांग कर रहा है।
भाजपा का पलटवार और जीत का श्रेय संगठन को
हालांकि अरविंद केजरीवाल के इन आरोपों पर भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक विस्तृत जवाब नहीं आया है, लेकिन पार्टी सूत्रों ने इसे ‘हार की हताशा’ करार दिया है। बंगाल, पुदुचेरी और असम में मिली सफलता से उत्साहित भाजपा नेता इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, संगठन की जमीनी मजबूती और कार्यकर्ताओं के कठिन परिश्रम का परिणाम बता रहे हैं। भाजपा का कहना है कि जनता ने विकास और सुशासन के नाम पर ‘कमल’ को चुना है।


