Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पचहत्तर करोड़ के प्लास्टिक एक्साइज होलोग्राम टेंडर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे पर्यावरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इस जनहित याचिका में आबकारी विभाग की खरीद प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
प्लास्टिक फ्री इंडिया अभियान और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन
यह टेंडर प्रधानमंत्री के ‘प्लास्टिक फ्री इंडिया’ अभियान के खिलाफ जारी किया गया था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में छत्तीस माइक्रोन के नॉन-रीसाइक्लेबल प्लास्टिक होलोग्राम खरीदे जा रहे हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सिद्धांतों का पूरी तरह उल्लंघन करता है।
पर्यावरण में चार सौ साल तक नष्ट नहीं होता यह प्लास्टिक
याचिका के अनुसार यह प्लास्टिक नॉन-बायोडिग्रेडेबल श्रेणी में आता है। पर्यावरण में इसकी उम्र लगभग तीन सौ से चार सौ साल होती है। समय के साथ यह खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर हमारी मिट्टी और पानी को प्रदूषित करता है। इससे पर्यावरण को स्थायी और गंभीर नुकसान पहुंचता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैधानिक निर्देशों की अनदेखी का आरोप
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस टेंडर को रद्द करने के लिए तीन बार कड़े निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। देश के कई अन्य राज्य अब पेपर और ईको-फ्रेंडली सुरक्षा लेबल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हाई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई सत्रह अगस्त दो हजार छब्बीस को होगी। याचिकाकर्ता ने साफ किया कि यह मामला कानून के शासन और हिमालय की सुरक्षा से जुड़ा है। जब सरकारी एजेंसियां ही नियमों को अनदेखा करती हैं, तब न्यायपालिका का हस्तक्षेप बहुत जरूरी हो जाता है।

