भोजशाला पर हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से देश में हलचल, विदेश से वापस आएगी मां वाग्देवी की प्रतिमा!

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है। इस निर्णय के बाद राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालय ने यह पूरी तरह स्वीकार किया है कि राजा भोज ने मां वाग्देवी के माध्यम से इस पावन स्थान की महत्ता और गरिमा को स्थापित किया था।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक स्थान के पुराने गौरव को दोबारा स्थापित किया जाएगा। इसके लिए विदेश से मां वाग्देवी की असली प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए सभी जरूरी और विधिसम्मत कानूनी प्रबंध किए जाएंगे। उन्होंने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के फैसले के बाद देश की जनता ने सामाजिक सौहार्द की एक उत्कृष्ट मिसाल कायम की थी।

न्यायालय का फैसला मध्य प्रदेश के भाईचारे की परीक्षा

डॉ. यादव ने उम्मीद जताई कि मध्य प्रदेश की जनता भी उसी महान परंपरा का पूरी तरह निर्वहन करेगी। पूरा राज्य इस संवेदनशील मामले में न्यायालय के अंतिम निर्णय को सहर्ष स्वीकार करके देश के सामने आपसी भाईचारे और शांति का एक नया परिचय देगा। दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है।

आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला का यह फैसला वास्तव में भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य और हमारी सनातन परंपरा की एक बहुत महत्वपूर्ण पुष्टि है। कोर्ट ने जांच के लिए देश की सबसे विशेषज्ञ संस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआइ को नियुक्त किया था। एएसआइ ने ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों और हिंदुओं की निरंतर उपासना पद्धति के आधार पर माना कि यह वाग्देवी का प्राचीन मंदिर था।

पूजा के लिए अब नहीं खानी पड़ेंगी लाठियां

इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भी अदालत के फैसले पर अपनी गहरी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ विशेष ऐतिहासिक परिस्थितियों की वजह से इस परिसर में नमाज अदा की जाने लगी थी। इस छिपे हुए सत्य को दोबारा स्थापित करने के लिए उनके पूर्वज लंबे समय से कड़ा संघर्ष कर रहे थे। अब हिंदू समाज को अपने ही मंदिर में पूजा के लिए लाठियां नहीं खानी पड़ेंगी।

सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी सबकी नजरें

दूसरी तरफ इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इंदौर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब देश की सर्वोच्च अदालत को यह तय करना होगा कि इस संरक्षित स्मारक के अंदर नियमित पूजा-अर्चना या प्रार्थना की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मामले पहले से ही वहां लंबित हैं।

इधर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के इस बड़े आदेश का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने दावा किया कि विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर पिछले 700 वर्षों से एक मस्जिद ही है। ओवैसी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस आदेश को पूरी तरह पलट देगा। उन्होंने 1935 के धार राज्य के राजपत्र और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का भी हवाला दिया।

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