Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां शुक्रवार सुबह तरबूज खाने के बाद एक पिता-पुत्र की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। परिजन दोनों को तुरंत जिला अस्पताल लेकर भागे। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही पिता की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं पुत्र की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है। इस घटना से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
परिजनों के अनुसार गुरुवार की रात को परिवार के चार सदस्यों ने एक साथ मिलकर कद्दू की सब्जी और रोटी खाई थी। इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे पिता और भाई को अचानक बेचैनी होने लगी। उनका गला सूख रहा था और सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी। घबराहट में परिजनों ने मटके के ठंडे पानी में रखे तरबूज को काटा और दोनों को खाने के लिए दे दिया। तरबूज खाते ही उनकी स्थिति और ज्यादा खराब हो गई।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम
मरीजों की हालत बिगड़ते देख परिजन उन्हें बिना समय गंवाए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने पिता की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत कोटा अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लेकिन कोटा ले जाते समय रास्ते में ही पिता ने दम तोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर बेटे का इलाज अभी भी श्योपुर के जिला अस्पताल में ही चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने के लिए वेंटिलेटर पर लगातार उपचार दे रही है।
इस पूरे मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरबी गोयल ने अपनी राय रखी है। उन्होंने तरबूज खाने से तबीयत बिगड़ने की आशंका को पूरी तरह खारिज किया है। डॉक्टर ने बताया कि दोनों की तबीयत रात में ही खराब हो चुकी थी, जबकि तरबूज उन्होंने सुबह खाया था। उन्होंने रात को कद्दू खाया था। हालांकि डॉक्टर ने यह सवाल भी उठाया कि अगर यह फूड प्वाइजनिंग का मामला होता, तो परिवार के बाकी सदस्य भी बीमार पड़ते।
पोस्टमार्टम और जांच के बाद खुलेगा असली राज
डॉक्टरों का कहना है कि अभी बिना किसी ठोस रिपोर्ट के मौत की असली वजह पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों मुंबई में भी तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की खबर आई थी। लेकिन बाद में फोरेंसिक जांच में पता चला कि उनके खाने में जिंक फास्फाइड यानी चूहे मारने की दवा मिली हुई थी। श्योपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब इस रहस्यमयी मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।

