Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा मानवीय और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। चुराह विधानसभा क्षेत्र का घुमंतू गुज्जर समुदाय इस समय दो राज्यों की राजनीति और नियमों के बीच पिस रहा है। पारंपरिक रूप से पशुपालन करने वाला यह समुदाय साल के छह महीने हिमाचल की पहाड़ियों और बाकी समय पंजाब के मैदानी इलाकों में बिताता है। इसी दोहरी जीवनशैली के कारण उनके नाम दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हो गए हैं, जो अब उनके अस्तित्व पर संकट बन गया है।
वोटर लिस्ट का विवाद और पहचान का संकट
गुज्जर समुदाय के लिए अपनी जड़ों को साबित करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। पंजाब में उन पर आरोप लग रहे हैं कि वे दो जगहों पर मतदान का अनुचित लाभ ले रहे हैं। वहां उन्हें स्थायी निवास के पुख्ता दस्तावेज दिखाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दबाव इतना बढ़ गया है कि कई परिवारों को बेदखल होने का डर सता रहा है। अपनी नागरिकता और हक को बचाने के लिए ये लोग अब प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं।
2003 के रिकॉर्ड की मांग और पुरानी जड़ें
समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पूर्वज पीढ़ियों से चम्बा के चुराह क्षेत्र में रहते आए हैं। अपनी पहचान को साबित करने के लिए वे प्रशासन से वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट की प्रमाणित कॉपी मांग रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि वे पंजाब में यह साबित कर देते हैं कि उनके बाप-दादा हिमाचल के मूल निवासी थे, तो उन्हें वहां प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। वे केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और विरासत की रक्षा करना चाहते हैं।
दोहरे वोट पर विरोध और प्रशासन की चुनौती
दूसरी तरफ, हिमाचल में भी इस मुद्दे पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। भेड़ पालक संगठन के अध्यक्ष हेमराज ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग राज्यों की वोटर लिस्ट में होना चुनाव नियमों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे लोगों के नाम चम्बा की मतदाता सूची से तुरंत हटा दिए जाने चाहिए। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह नियमों और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाता है।


