Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चर्चित विमल नेगी संदिग्ध मौत मामले में न्याय की घड़ी करीब आ गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस हाई-प्रोफाइल केस में अपना चालान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत में पेश कर दिया है। अदालत ने मामले की पहली सुनवाई के लिए 31 मार्च की तारीख मुकर्रर की है। इस दिन होने वाली कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उम्मीद है कि इसी दिन आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे और इंसाफ की कानूनी लड़ाई को नई दिशा मिलेगी।
अदालत में CBI का कड़ा रुख, सरकारी वकील करेंगे पैरवी
सीबीआई की ओर से इस मामले में सरकारी वकील पूरी ताकत से अपना पक्ष रखेंगे। चालान पेश होने के बाद अब पूरी जांच न्यायिक प्रक्रिया के अधीन आ गई है। दूसरी तरफ, इस मामले में प्रतिवादी पक्ष के रूप में हरिकेश मीना, देश राज और पंकज शर्मा के नाम सामने आए हैं। 31 मार्च की सुनवाई में इन पक्षों के बीच कानूनी जिरह शुरू होगी। विमल नेगी के परिजनों के लिए यह दिन बहुत मायने रखता है क्योंकि वे लंबे समय से सच सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
HPPCL अधिकारी की मौत ने दहला दिया था हिमाचल
विमल नेगी एचपीपीसीएल (HPPCL) में एक वरिष्ठ पद पर तैनात थे। उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद परिजनों और कई सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। जनता के भारी दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। अब जांच एजेंसी ने अपनी मेहनत से तैयार किया गया चालान अदालत को सौंप दिया है।
31 मार्च: निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा केस
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 31 मार्च को होने वाली सुनवाई इस केस का रुख तय करेगी। इसी दिन अदालत तय करेगी कि आरोप पत्र के आधार पर आगे का ट्रायल कैसे चलेगा। विमल नेगी के शुभचिंतकों और प्रदेश की जनता की निगाहें अब शिमला की अदालत पर टिकी हैं। क्या सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूत आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त होंगे? यह सवाल फिलहाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है।


