Mandi News: अस्पताल में मरीजों को दवा खिलाते या आपदा में लोगों की जान बचाते इंसानी चेहरे वाले रोबोट अब कल्पना नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के वैज्ञानिक इस सपने को सच कर रहे हैं। यहां खास तरह के स्मार्ट रोबोट तैयार किए जा रहे हैं। ये रोबोट भविष्य में स्वास्थ्य सेवा, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान करेंगे।
रिसर्च से लेकर समाज की भलाई तक
आईआईटी मंडी का ‘सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स’ इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसके साथ ‘सेंटर फॉर ह्यूमन-कम्प्यूटर इंटरेक्शन’ के वैज्ञानिक भी जुड़े हैं। ये वैज्ञानिक मोबाइल रोबोट, ह्यूमनॉइड (मानवाकृति) रोबोट, ड्रोन और पानी के अंदर काम करने वाले रोबोट बना रहे हैं। फिलहाल ये मशीनें अनुसंधान और प्रयोगात्मक स्तर पर हैं। इनका मुख्य मकसद समाज को सीधा फायदा पहुंचाना और इंसानी जीवन को आसान बनाना है।
हर मुश्किल काम करेंगे ये रोबोट
ये रोबोट भविष्य में आपदा राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों और नर्सों की मदद करेंगे। इसके अलावा कृषि निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इनका इस्तेमाल होगा। सबसे खास बात यह है कि ये रोबोट न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी खतरनाक जगहों की निगरानी भी कर सकेंगे। मशीनों के इस इस्तेमाल से इंसानी जान का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा।
जल्द सामने आएंगे सार्थक परिणाम
आईआईटी मंडी के रोबोटिक्स प्रोग्राम्स के प्रमुख प्रोफेसर नरेंद्र कुमार धर इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रोफेसर धर बताते हैं कि रोबोट तकनीक पर लगातार गहन शोध जारी है। शोध का काम अब परिणाम के स्तर तक पहुंच गया है। आने वाले समय में हर क्षेत्र की जरूरतों को ये स्मार्ट रोबोट आसानी से पूरा करेंगे। देश के तकनीकी विकास में यह कदम एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।


