कानपुर किडनी कांड का डरावना सच: फ्लाइट से आता था डॉक्टरों का गिरोह, जानिए कौन निकालता था गुर्दे

Uttar Pradesh News: कानपुर के बहुचर्चित किडनी कांड में पुलिस ने एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप ने पुलिस पूछताछ में बड़े राज उगले हैं। इन दोनों ने बताया है कि किडनी निकालने और ट्रांसप्लांट करने का यह पूरा खेल कैसे चलता था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में बाकायदा विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल थे। पुलिस अब इन फरार डॉक्टरों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

डॉक्टर रोहित बेहोश करता था, डॉक्टर अली निकालता था गुर्दे

गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि ऑपरेशन थियेटर के अंदर हर किसी का काम बंटा हुआ था। डॉक्टर रोहित इस गिरोह का एनेस्थीसिया विशेषज्ञ है। वह किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान मरीजों को बेहोश करने का काम करता था। इसके बाद दिल्ली के द्वारका का रहने वाला डॉक्टर अली अपना काम शुरू करता था। डॉक्टर अली ही मरीजों की किडनी निकालता था और उसे दूसरे मरीज के शरीर में लगाता था। डॉक्टर अली इस काम के लिए कभी अकेला नहीं आता था। वह अपने साथ डॉक्टर सैफ और दो असिस्टेंट अखिलेश तथा शैलेंद्र को लेकर चलता था।

सेमिनार में हुई मुलाकात और शुरू हुआ काला धंधा

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने गाजियाबाद के सुदामा पुरी निवासी राजेश कुमार से लंबी पूछताछ की। राजेश ग्रेटर नोएडा वेस्ट के 220 बेड वाले सर्वोदय अस्पताल में ओटी मैनेजर के पद पर तैनात था। यहां उसे हर महीने 70 हजार रुपये वेतन मिलता था। करीब तीन साल पहले उसकी मुलाकात गाजियाबाद के वैशाली अस्पताल में एक सेमिनार के दौरान डॉक्टर रोहित से हुई थी। डॉक्टर रोहित ने राजेश के काम को देखकर उसे अपने साथ मिलाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद राजेश और उसका साथी कुलदीप इस काले धंधे में शामिल हो गए।

फ्लाइट से आती थी टीम, रिसीवर से वसूला जाता था खर्च

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जनवरी से लेकर अब तक वे लोग पांच किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं। डीसीपी पश्चिम ने जानकारी दी कि डॉक्टरों की यह पूरी टीम फ्लाइट से कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट पहुंचती थी। आने-जाने का यह भारी भरकम खर्च किडनी लेने वाले मरीज के पैकेज में जोड़ा जाता था। कानपुर के आहूजा अस्पताल में आठ डॉक्टरों की टीम ने यह अवैध ऑपरेशन किया था। इस जटिल ऑपरेशन में करीब पांच से छह घंटे का समय लगा था।

रात के अंधेरे में कार से लौटते थे आरोपी

ऑपरेशन खत्म होने के बाद यह टीम रात के अंधेरे में कार से वापस लौटती थी। पुलिस की पूछताछ में कार चालक अजय यादव ने कई अहम बातें बताईं। अजय ही इस पांच लोगों की टीम को लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे तक छोड़कर आया था। कार में सफर के दौरान ये लोग दमन दीव घूमने की योजना बना रहे थे। दूसरी ओर, सर्वोदय अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि राजेश बुधवार को अपनी नौकरी छोड़ चुका है। वहीं, शांति गोपाल अस्पताल के निदेशक डॉक्टर संजय गर्ग कुलदीप की गिरफ्तारी से पूरी तरह हैरान हैं।

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