Mumbai News: भारत के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक पर दुबई सरकार ने बड़े आरोप लगाए हैं। दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण (DFSA) का कहना है कि बैंक का प्रबंधन ग्राहकों को गलत तरीके से क्रेडिट सुइस बॉन्ड बेचने के मामले का समाधान करने में पूरी तरह नाकाम रहा। यह समस्या दुबई और बहरीन में बैंक के कर्मचारियों की गलत बिक्री के कारण पैदा हुई थी। छह महीने पहले ही डीएफएसए ने एचडीएफसी की दुबई शाखा के वरिष्ठ प्रबंधन को फटकार लगाई थी। अब यह मामला और गहरा गया है।
पांच साल तक चुप्पी और नियमों की अनदेखी
दुबई नियामक कीजांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एचडीएफसी की शाखा ने पांच साल तक चुप्पी साधे रखी। उसने ईमानदारी से नियमों का पालन नहीं किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक के अपने नैतिक पैनल ने भी ग्राहकों को जोड़ने के दौरान बड़ी संख्या में नियामक उल्लंघन पकड़े थे। डेलॉयट और क्रोल ने भी अलग से जांच की थी। बैंक के सीईओ के इस बयान से तथ्य मेल नहीं खाते कि ये सिर्फ तकनीकी खामियां थीं।
चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने भी लगाए थे आरोप
एचडीएफसीबैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने हाल ही में बोर्ड से इस्तीफा दिया था। वह 2021 से बैंक में नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन थे। उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में साफ कहा था कि पिछले दो सालों में उन्होंने कुछ ऐसे घटनाक्रम और आंतरिक तौर-तरीके देखे, जो उनके निजी मूल्यों और नैतिक मानकों के खिलाफ थे। यही वजह थी कि उन्होंने पद छोड़ दिया।
दुबई के आरोपों से चक्रवर्ती के दावे सच हुए
अब दुबई स्थित नियामक केताजा आरोपों के बाद अतानु चक्रवर्ती के आरोप सच साबित होते दिख रहे हैं। हालांकि, बैंक प्रबंधन ने चक्रवर्ती के आरोपों पर सफाई पेश कर दी थी। लेकिन डीएफएसए की जांच में बैंक की गंभीर कमियां सामने आई हैं। रेगुलेटर ने पाया कि बैंक की अनुपालन टीम को अतिरिक्त टियर-1 (AT1) बॉन्ड की गलत बिक्री की जानकारी थी। इसके बावजूद समय रहते कोई सुधार नहीं किया गया।


