आजादी के 7 दशक बाद भी खून की कमी से जूझ रहीं महिलाएं, हैरान करने वाले आंकड़े खोल रहे सरकारी दावों की पोल

India News: आजादी के सात दशक बाद भी देश की आधी आबादी खून की कमी यानी एनीमिया से जूझ रही है। स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च हो रहे भारी भरकम बजट के बावजूद 15 से 49 साल की 55.3 प्रतिशत महिलाएं आज भी इस गंभीर बीमारी की शिकार हैं। पिछले 20 सालों में पंजाब और गुजरात जैसे संपन्न राज्यों में स्थिति सुधरने की बजाय और भी ज्यादा खराब हुई है। इसके साथ ही देश में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में भी ढाई गुना तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पंजाब और गुजरात में सबसे ज्यादा बिगड़े हालात

पिछले दो दशकों में कई राज्यों में एनीमिया के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं। पंजाब की स्थिति इस मामले में सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां 20 साल के भीतर एनीमिया की दर में 54.4 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। जम्मू-कश्मीर में 26.4 प्रतिशत और गुजरात में 17.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश की राजधानी दिल्ली में भी यह आंकड़ा 12.6 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और हरियाणा में भी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े हालात लगातार खराब हुए हैं।

इन तीन राज्यों ने दिखाया मामूली सुधार

एक तरफ संपन्न राज्य इस बीमारी से निपटने में पिछड़ रहे हैं। वहीं, कुछ पिछड़े माने जाने वाले राज्यों ने मामूली ही सही लेकिन सुधार जरूर दिखाया है। झारखंड में एनीमिया के मामलों में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। बिहार में 5.7 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 2.3 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का जमीन पर असर हर राज्य में अलग-अलग तरह से हो रहा है।

लद्दाख में 92 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार

देश में एनीमिया को लेकर लद्दाख के हालात सबसे ज्यादा भयानक हैं। यहां की 92.8 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं। पश्चिम बंगाल में 71.4 प्रतिशत और त्रिपुरा में 67.2 प्रतिशत महिलाएं प्रभावित हैं। असम और जम्मू-कश्मीर में भी 65.9 प्रतिशत महिलाएं इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। वहीं, लक्षद्वीप, नगालैंड, मणिपुर और केरल में स्थिति काफी बेहतर है। लक्षद्वीप में केवल 25.8 प्रतिशत महिलाएं ही एनीमिया से पीड़ित पाई गई हैं।

ऑनलाइन अपराधों ने बढ़ाई महिलाओं की मुश्किलें

महिलाओं के लिए अब सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा भी एक बहुत बड़ा खतरा बन गई है। पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध बहुत तेजी से बढ़े हैं। साल 2021 में महिलाओं ने कुल 72,301 शिकायतें दर्ज कराई थीं। यह डराने वाला आंकड़ा साल 2025 में बढ़कर 1,73,766 तक पहुंच गया है। पुलिस के पास सबसे ज्यादा मामले फर्जी प्रोफाइल बनाने और दूसरे के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के आ रहे हैं।

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