सेट-टॉप बॉक्स की छुट्टी! सरकार के इस नए टीवी नियम से आम आदमी को कैसे होगा सीधा फायदा?

New Delhi: टीवी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब आपको सेट-टॉप बॉक्स या तारों के जंजाल की जरूरत नहीं पड़ेगी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक नई तकनीक पेश की है। अब नए टीवी सेट्स में इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर लगा होगा। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। आप दूरदर्शन के ‘डीडी फ्री डिश’ चैनल बिना किसी बॉक्स के देख सकेंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल की शुरुआत की है। इससे न सिर्फ आपका पैसा बचेगा, बल्कि टीवी देखने का अनुभव भी शानदार होगा।

कैसे काम करेगी बिना सेट-टॉप बॉक्स वाली तकनीक?

इस नई तकनीक में टीवी के अंदर ही एक सैटेलाइट ट्यूनर होगा। यह ट्यूनर सीधे सैटेलाइट से चैनल के सिग्नल पकड़ेगा। टीवी में एक स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (EPG) भी दिया गया है। यह गाइड बिल्कुल आपके मोबाइल की तरह काम करेगा। दर्शक आसानी से अपने पसंदीदा चैनल और उनके समय की जानकारी देख सकेंगे। कई रिमोट संभालने की झंझट अब खत्म हो जाएगी। दर्शक एक ही रिमोट से सब कुछ आसानी से कंट्रोल कर पाएंगे।

क्रिएटर्स के लिए लॉन्च हुआ नया प्लेटफॉर्म MyWAVES

सरकार ने सिर्फ दर्शकों का ही नहीं, बल्कि क्रिएटर्स का भी ध्यान रखा है। ‘MyWAVES’ नाम का एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। यह प्लेटफॉर्म WAVES OTT का एक अहम हिस्सा है। अब यूजर यहाँ सिर्फ वीडियो देखेंगे ही नहीं। वे खुद का कंटेंट बनाकर शेयर भी कर सकेंगे। आप यहाँ शॉर्ट वीडियो, वर्टिकल वीडियो और सीरीज भी बना सकते हैं। इसमें कई भारतीय भाषाओं का सपोर्ट भी दिया गया है। देशभर के क्रिएटर्स अपनी मातृभाषा में अपनी पहचान बना सकेंगे।

गूगल और यूट्यूब के साथ मिलकर मिलेगी AI ट्रेनिंग

सरकार ने डिजिटल दुनिया में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘नेशनल AI स्किलिंग इनिशिएटिव’ की शुरुआत की गई है। यह प्रोग्राम गूगल और यूट्यूब के साथ मिलकर शुरू हुआ है। इसका मकसद मीडिया सेक्टर के लोगों को नई तकनीक सिखाना है। इसके तहत करीब 15,000 लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग दी जाएगी। गुंजन सोनी ने बताया कि AI भारत की क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए नए अवसर खोलेगा। इसमें एनीमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स पर खास फोकस रहेगा।

ऑरेंज इकोनॉमी से कैसे बदलेगी देश की तस्वीर?

इन सभी नई पहलों का मुख्य मकसद भारत की ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को मजबूत करना है। ऑरेंज इकोनॉमी का सीधा मतलब क्रिएटिव अर्थव्यवस्था से है। इसमें डिजिटल आर्ट्स, कंटेंट क्रिएशन, मीडिया और एंटरटेनमेंट शामिल होते हैं। तकनीक और क्रिएटिविटी के दम पर भारत इस क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बन सकता है। इस बदलाव से आम इंसान के लिए मनोरंजन सस्ता हो जाएगा। वहीं डिजिटल दुनिया में करियर बनाने वालों के लिए कमाई के नए दरवाजे खुलेंगे।

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