Delhi News: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर अहम बातचीत की है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा रहा। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में तेल ठिकानों पर हो रहे हमलों की निंदा की और विवादों को कूटनीति से सुलझाने पर जोर दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है।
समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर बनी सहमति
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए इस महत्वपूर्ण संवाद की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के सख्त खिलाफ है। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री परिवहन की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। समुद्री रास्तों को सुरक्षित और खुला रखना वैश्विक बाजार की स्थिरता के लिए अनिवार्य है। पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत किसी भी तरह की हिंसा के बजाय बातचीत के जरिए शांति बहाली का पक्षधर है।
भारतीय समुदाय और ऊर्जा जरूरतों की चिंता
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने सऊदी अरब में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने वहां मौजूद भारतीय समुदाय का ख्याल रखने के लिए क्राउन प्रिंस का विशेष आभार व्यक्त किया। बता दें कि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब से ही मंगवाता है। ऐसे में युद्ध की स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। पीएम मोदी लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में हैं ताकि भारतीयों के हितों और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
शांति के लिए भारत की सक्रिय कूटनीति
28 फरवरी को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद पीएम मोदी की क्राउन प्रिंस से यह तीसरी बड़ी मुलाकात है। इससे पहले पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की थी। भारत ने हर मंच पर युद्ध रोकने और शांति बहाल करने की अपील की है। संसद में भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया के हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत की यह सक्रियता दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर संकट सुलझाने में नई दिल्ली की भूमिका कितनी अहम हो गई है।


