Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघीय अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एच-1बी (H-1B) वीजा पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम शुल्क को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इस न्यायिक आदेश के बाद राष्ट्रपति ट्रंप बुरी तरह भड़क गए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय अदालत के इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जजों के इस तरह के फैसले देश को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रहे हैं। न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने जजों की कार्रवाई को पूरी तरह पागलपन और देश के लिए नुकसानदेह बताया।
जज ने फैसले को टैक्स की तरह माना
मैसाचुसेट्स में बोस्टन स्थित फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एक लाख डॉलर का यह शुल्क वास्तव में एक टैक्स की तरह है। इसे लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से कोई वैधानिक मंजूरी नहीं ली गई थी।
ट्रंप प्रशासन ने अत्यधिक कुशल विदेशी श्रमिकों के लिए यह भारी शुल्क अनिवार्य किया था। अदालत द्वारा इसे अवैध घोषित किए जाने के बाद व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे और इसके खिलाफ अपीलीय अदालत में चुनौती दी जाएगी।
सॉफ्टवेयर कंपनियों पर बढ़ा था भारी बोझ
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने ट्रंप प्रशासन की नीति का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग किया जा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने और अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा के लिए यह ऐतिहासिक कार्रवाई की थी।
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में यह नया शुल्क नियम लागू किया था। इससे पहले अमेरिकी नियोक्ताओं को एच-1बी वीजा आवेदन के लिए आमतौर पर केवल दो हजार से पांच हजार डॉलर तक का सामान्य शुल्क देना पड़ता था, जिसे अचानक बढ़ा दिया गया था।
लागत बढ़ने से आवेदनों में आई थी भारी गिरावट
इस नई व्यवस्था के तहत वीजा की लागत में इतनी भारी वृद्धि हो गई थी कि कंपनियों के लिए आवेदन करना नामुमकिन हो गया। इसके कारण आवेदन संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 फरवरी 2026 तक केवल 85 आवेदकों ने ही यह भारी शुल्क जमा कराया था।
आमतौर पर एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत हर वर्ष 65,000 नियमित वीजा जारी किए जाते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा सुरक्षित रखे जाते हैं, जिससे दुनिया भर के आईटी पेशेवर अमेरिका आते हैं।
भारतीय आईटी पेशेवरों ने मनाई बड़ी खुशी
भारतीय आईटी पेशेवर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर इस वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं। हाल के वर्षों के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका द्वारा स्वीकृत किए जाने वाले कुल एच-1बी वीजा में लगभग तीन-चौथाई यानी 75 फीसदी हिस्सेदारी अकेले भारतीयों की होती है।
इस अदालती फैसले का भारतीय-अमेरिकी संगठनों और व्यापारिक समूहों ने खुले दिल से स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से रोजगार आधारित अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में भरोसा लौटेगा। इसके साथ ही अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा, नवाचार और वैज्ञानिक शोध को वैश्विक स्तर पर बड़ी ताकत मिलेगी।
Author: Pallavi Sharma


