Delhi News: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए विशाल प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सांप्रदायिक राजनीति और खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं।
जंतर-मंतर पर देश के कई राज्यों से उमड़ा भारी जनसैलाब
इस बड़े विरोध प्रदर्शन में राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। जंतर-मंतर का पूरा इलाका दिनभर प्रदर्शनकारियों के नारों से गूंजता रहा। इस आंदोलन को समर्थन देने प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक भी विशेष रूप से पहुंचे थे।
अभिजीत दिपके ने हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर खड़े किए तीखे सवाल
अपने आक्रामक भाषण में अभिजीत दिपके ने पूछा कि सालों से जारी हिंदू-मुस्लिम राजनीति से आम जनता को क्या फायदा हुआ? उन्होंने कहा कि देश को अब वास्तविक मुद्दों पर चर्चा की सख्त जरूरत है। दिपके ने भावुक होकर कहा कि उनकी मां को हमेशा सरकार द्वारा जेल में डालने का डर सताता है।
देश में बढ़ती बेरोजगारी को युवाओं ने बताया सबसे बड़ी समस्या
कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से वक्ताओं ने देश में बढ़ती बेरोजगारी पर गहरी चिंता व्यक्त की। दिपके ने साफ शब्दों में कहा कि युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना किसी भी चुनी हुई सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, जिससे आज की व्यवस्था पूरी तरह भटक चुकी है।
खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की पुरजोर मांग
इस बड़े आंदोलन के दौरान भारी संख्या में जुटे छात्रों ने देश के मौजूदा एजुकेशन सिस्टम में आमूलचूल सुधार की मांग की। मंच पर आए कई छात्र नेताओं ने विभिन्न सरकारी परीक्षाओं और नौकरी भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी तरह पारदर्शिता लाने की जरूरत पर विशेष बल दिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे पर अड़े छात्र
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पर अड़ गए। युवाओं का सीधा आरोप था कि देश में शिक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों का समाधान करने में मंत्रालय पूरी तरह विफल साबित हुआ है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय है।
धार्मिक ध्रुवीकरण छोड़ युवाओं और रोजगार को राजनीति के केंद्र में लाएं
अभिजीत दिपके ने हुंकार भरते हुए कहा कि देश की मुख्य राजनीति का केंद्र बिंदु युवा, रोजगार और शिक्षा होना चाहिए, न कि धार्मिक ध्रुवीकरण। विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने छह प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।
दिनभर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करता रहा आंदोलन
इस बड़े जमीनी प्रदर्शन का व्यापक असर इंटरनेट पर भी साफ दिखाई दिया। आंदोलन से जुड़े विभिन्न हैशटैग पूरे दिन सोशल मीडिया के शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल रहे। देश भर के लाखों डिजिटल यूजर्स और युवाओं ने ऑनलाइन माध्यम से इस प्रदर्शन पर अपनी मजबूत प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
भारी पुलिस बल की कड़े पहरे में शांतिपूर्ण संपन्न हुआ कार्यक्रम
दिल्ली पुलिस की भारी मौजूदगी और कड़े पहरे के बीच यह पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी के कारण कहीं से भी किसी अप्रिय घटना या बड़ी अनहोनी की सूचना नहीं मिली। प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन के साथ अपनी बातें सरकार के सामने रखीं।
राजनीतिक दलों में छिड़ी बहस और दिपके का सनसनीखेज खुलासा
इस आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई बहस छिड़ गई है। कुछ नेताओं ने इसे युवाओं की असली आवाज बताया तो कुछ ने इसे सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। प्रदर्शन खत्म होने के बाद अभिजीत दिपके ने एक साल बाद अपने माता-पिता से मिलने जाने की बात कही।
अभिजीत दिपके ने रोते हुए सनसनीखेज दावा किया कि पिछले 15 दिनों में उन्होंने बहुत कष्ट झेला है। लगातार मिल रही गंभीर धमकियों के कारण उन्हें अपना घर तक छोड़ना पड़ा था। उन्होंने जाते-जाते सरकार को चेतावनी दी कि आज का यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक छोटा सा ट्रेलर था।
Author: Gaurav Malhotra


