NEET UG 2026 रद होने से सुलग रहे कई सवाल; आखिर क्यों चीन, अमेरिका और ब्रिटेन में कभी लीक नहीं होते पेपर?

New Delhi News: नीट यूजी 2026 परीक्षा के रद होने की हालिया घटना ने एक बार फिर भारत की पूरी मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को सरेआम उजागर कर दिया है। दुनिया के कई अन्य बड़े देश भी हर साल बहुत बड़े पैमाने पर ऐसी ही मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन विकसित देशों में पेपर लीक होने की घटनाएं बेहद दुर्लभ या न के बराबर होती हैं।

वैश्विक स्तर पर पेपर लीक रोकने का सबसे बड़ा कारण यह है कि ये देश परीक्षाओं के लिए अस्थायी स्कूल-आधारित परीक्षा केंद्रों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते हैं। इसके बजाय वे अत्याधुनिक और स्थायी कंप्यूटर-आधारित परीक्षा केंद्रों का व्यापक उपयोग करते हैं। इसके साथ ही वहां सभी उम्मीदवारों को एक समान प्रश्नपत्र मिलने के बजाय, उनका विशेष सॉफ्टवेयर खुद ही विभिन्न प्रकार के प्रश्न सेट तैयार करता है।

पेपर बनाम कंप्यूटर-आधारित डिजिटल सुरक्षा प्रणाली

भारत में 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए केवल एक दिवसीय और पूरी तरह पेपर-आधारित नीट परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसके विपरीत कई अन्य देश कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं, कई अलग-अलग परीक्षा तिथियां और बेहद मजबूत डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल का उपयोग करते हैं। भारत में नीट परीक्षा एक ही दिन में हजारों केंद्रों पर एक समान प्रश्न पत्र के साथ आयोजित की जाती है, जिससे जोखिम बढ़ता है।

इस पुरानी व्यवस्था के तहत प्रश्न पत्र को पूरे देश में छापना, परिवहन करना, सुरक्षित भंडारण करना और फिर वितरित करना अत्यंत गोपनीय तरीके से करना आवश्यक होता है। सुरक्षा अधिकारी इन सभी चरणों को ही लीक और हेरफेर के लिए सबसे अधिक संवेदनशील और कमजोर मानते हैं। इसके विपरीत अमेरिका और ब्रिटेन जैसे आधुनिक देश मुख्य रूप से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए मजबूत कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली पर ही पूरी तरह निर्भर हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी गाओकाओ परीक्षा और चीन की सुरक्षा

चीन की मशहूर गाओकाओ परीक्षा को विश्व स्तर पर सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। यह परीक्षा अत्यंत कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संचालित होती है। परीक्षा के दौरान उच्च तकनीक वाले निगरानी कैमरे, बायोमेट्रिक सत्यापन, सिग्नल जैमर, विशेष रूप से एन्क्रिप्टेड सिस्टम और कड़ी निगरानी वाली प्रिंटिंग सुविधाओं का उपयोग किया जाता है। हालांकि वहां कभी-कभार नकल की घटनाएं होती हैं, लेकिन बड़े पेपर लीक वहां दुर्लभ हैं।

अमेरिका का एमसीएटी और ब्रिटेन का यूसीएटी मॉडल

अमेरिका में मेडिकल कॉलेज प्रवेश परीक्षा यानी ‘एमसीएटी’ पूरे वर्ष में कई अलग-अलग तिथियों पर केवल विशेष परीक्षा केंद्रों पर ही आयोजित की जाती है। वहां उम्मीदवारों को एक व्यापक और सुरक्षित प्रश्न बैंक से लिए गए विभिन्न प्रश्न सेट दिए जाते हैं। इससे किसी एक प्रश्न पत्र के लीक होने का जोखिम पूरी तरह से खत्म हो जाता है। ब्रिटेन में भी ठीक इसी तरह की बहुत मजबूत और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू की गई है।

ब्रिटेन में होने वाली इस परीक्षा को यूनिवर्सिटी क्लिनिकल एप्टीट्यूड टेस्ट यानी ‘यूसीएटी’ कहा जाता है। ये परीक्षाएं कई दिनों या हफ्तों तक लगातार ऑनलाइन आयोजित की जाती हैं। इसमें उम्मीदवार सख्त निगरानी और सुरक्षित सॉफ्टवेयर से लैस अधिकृत केंद्रों पर अपनी सुविधा के अनुसार खुद टाइम स्लॉट चुन सकते हैं। इस आधुनिक तरीके से परीक्षा की गोपनीयता हर हाल में पूरी तरह सुरक्षित बनी रहती है।

भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी का अभाव

भारत में लगभग 25 लाख छात्रों के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करना वर्तमान में एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए कंप्यूटर-आधारित परीक्षा सुविधाओं का देशव्यापी विस्तार करना आवश्यक होगा, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में इसकी भारी कमी है। कुछ क्षेत्रों में आज भी इंटरनेट कनेक्टिविटी, अचानक बिजली कटौती और अपर्याप्त तकनीकी सहायता जैसी चुनौतियां इस राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

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