ज्येष्ठ मास का आगाज: 19 साल बाद दुर्लभ संयोग में पड़ेंगे 8 बड़े मंगल, 25 मई से शुरू होगा ‘नौतपा’

New Delhi News: अप्रैल के महीने में ही भीषण गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे, लेकिन अब असली परीक्षा शुरू होने वाली है। शनिवार से हिंदू कैलेंडर का सबसे गर्म महीना ‘ज्येष्ठ’ शुरू हो चुका है, जिसमें सूर्य की तपिश और अधिक बढ़ जाती है। खास बात यह है कि इस साल अधिक मास होने के कारण ज्येष्ठ का महीना पूरे 59 दिनों का होने वाला है। इस दुर्लभ संयोग की वजह से इस बार हनुमान भक्तों को ज्येष्ठ मास में आठ ‘बड़े मंगलवार’ मनाने का अवसर मिलेगा।

25 मई से शुरू होगा भीषण गर्मी का ‘नौतपा’

ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा के अनुसार, 25 मई को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य के रोहिणी में प्रवेश करते ही ‘नौतपा’ की शुरुआत हो जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आता है, तो शुरुआती नौ दिनों तक गर्मी अपने चरम पर होती है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान में भारी बढ़ोतरी होती है। इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 8 जून तक चलेगा।

नौतपा की तपन देगी अच्छी बारिश के संकेत

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, नौतपा का अत्यधिक तपना भविष्य के लिए शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यदि इन नौ दिनों में भयंकर गर्मी पड़ती है, तो मानसून के दौरान अच्छी वर्षा होती है, जो खेती-बाड़ी के लिए बहुत लाभकारी है। वहीं, यदि नौतपा के दौरान बारिश हो जाए, तो मानसून कमजोर पड़ जाता है और फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। खगोल विज्ञान भी इस दौरान सूर्य की लंबवत किरणों को बढ़ते तापमान का मुख्य कारण मानता है।

19 साल बाद बना 8 बड़े मंगलवार का दुर्लभ योग

इस साल ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। अधिक मास के कारण करीब 19 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब एक ही ज्येष्ठ महीने में आठ बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। पहला मंगल 5 मई को है और अंतिम 23 जून को होगा। इन दिनों में हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही इस महीने में वट सावित्री व्रत, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे प्रमुख त्योहार भी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे।

गर्मी से बचाव के उपाय और धार्मिक विधान

ज्येष्ठ मास में जलदान का विशेष महत्व बताया गया है। गर्मी से बचने के लिए मंदिरों में भी भगवान के भोग और पहनावे में बदलाव किया गया है। अब भगवान को शीतल पेय, फलों का रस और सत्तू अर्पित किया जा रहा है। आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे राहगीरों को शरबत और छाछ पिलाएं। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना भी इस महीने में अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गर्मी से बचाव के लिए सूती कपड़े और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।

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