Assam News: असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के राजनीतिक कौशल और जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र पर उनकी मजबूत पकड़ को प्रमाणित कर दिया है। सोमवार को घोषित परिणामों के अनुसार, मुख्यमंत्री सरमा ने इस हॉट सीट से लगातार छठी बार जीत हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी और कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से पराजित किया। यह जीत न केवल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य में सरमा के निर्विवाद नेतृत्व पर जनता की मुहर भी है।
जालुकबारी में बिखरा कांग्रेस का किला, बिदिशा नियोग की बड़ी हार
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, हिमंत बिस्व सरमा को कुल 1,27,151 वोट प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस की बिदिशा नियोग मात्र 37,717 वोटों पर सिमट गईं। मतगणना के शुरुआती दौर से ही कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़ती नजर आईं और अंत तक हार का अंतर 89,434 वोटों तक पहुंच गया। मुख्यमंत्री को उनके अपने गढ़ में चुनौती देने का कांग्रेस का यह दांव पूरी तरह विफल साबित हुआ। भाजपा समर्थकों ने इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाते हुए इसे विकास और सुशासन की जीत बताया है।
ढाई दशक से ‘अजेय’ हैं हिमंत बिस्व सरमा
जालुकबारी विधानसभा सीट पिछले 25 वर्षों से हिमंत बिस्व सरमा का अभेद्य दुर्ग बनी हुई है। वर्ष 2001 से वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पहली तीन जीत (2001, 2006 और 2011) कांग्रेस के टिकट पर हासिल की थी, जबकि 2016, 2021 और अब 2026 की जीत भाजपा के बैनर तले दर्ज की है। इस सीट पर सरमा का वोट प्रतिशत हर चुनाव के साथ बेहतर हुआ है। 9 अप्रैल को हुए मतदान में यहाँ 82.04% भारी वोटिंग दर्ज की गई थी, जिसके संकेत मुख्यमंत्री के पक्ष में स्पष्ट थे।
भाजपा नीत एनडीए की राज्य में फिर वापसी के संकेत
जालुकबारी के नतीजों के साथ ही असम की अन्य 126 सीटों पर भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों (NDA) ने शानदार प्रदर्शन किया है। रुझानों और अब तक के परिणामों के अनुसार, एनडीए ने बहुमत का जादुई आंकड़ा आसानी से पार कर लिया है, जिससे राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना तय हो गया है। मुख्यमंत्री के रूप में सरमा द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधारों और ‘मिया’ मुसलमानों के खिलाफ उनके कड़े रुख को इस जीत का प्रमुख वैचारिक आधार माना जा रहा है। विपक्षी गठबंधन ‘असोम सोनमिलितो मोर्चा’ इस चुनावी लहर के सामने कहीं टिकता नजर नहीं आया।


