New Delhi News: भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाले ‘तेजस मार्क 1ए’ फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच भड़के युद्ध ने भारत की सुरक्षा तैयारियों पर सीधा असर डाला है। इस स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए अमेरिका से इंजन और इजरायल से रडार मिलने थे। लेकिन युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण इनकी सप्लाई रुक गई है। इससे वायुसेना को समय पर लड़ाकू विमान मिलने की योजना को बड़ा झटका लगा है।
अमेरिका ने क्यों रोकी इंजनों की सप्लाई?
भारत ने अपने तेजस विमानों के लिए अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी से करार किया था। कंपनी को F404 इंजन की सप्लाई करनी थी। शुरुआत में तय समयसीमा के अंदर कुछ इंजन भारत को मिलने थे। लेकिन सप्लाई चेन की दिक्कतों का हवाला देकर कंपनी ने डिलीवरी में देरी कर दी है। अब इंजन मिलने की नई समयसीमा काफी आगे बढ़ गई है। इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का उत्पादन का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बिना इंजन के लड़ाकू विमान तैयार करना बिल्कुल नामुमकिन है।
इजरायली रडार पर युद्ध का सीधा असर
तेजस की असली ताकत उसका अत्याधुनिक रडार सिस्टम है। यह खास रडार इजरायल की तकनीक से लैस है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे भयानक युद्ध ने इस रडार की सप्लाई भी रोक दी है। इजरायल फिलहाल अपनी आंतरिक सुरक्षा और युद्ध में उलझा हुआ है। इसके अलावा कुछ जरूरी पुर्जों के सोर्स कोड को लेकर भी पेंच फंसा है। रडार और अन्य जरूरी उपकरणों की कमी के कारण तेजस विमान पूरी तरह तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
भारतीय वायुसेना की बढ़ी चिंताएं
वायुसेना को जल्द से जल्द 83 नए तेजस मार्क 1ए विमान मिलने थे। इनका मकसद पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह लेना है। मिग-21 विमानों को वायुसेना पहले ही रिटायर कर चुकी है। ऐसे में लड़ाकू विमानों की कमी वायुसेना की चिंता लगातार बढ़ा रही है। चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए तेजस की तुरंत जरूरत है। सरकार अब विदेशी कंपनियों पर जल्द सप्लाई के लिए दबाव बना रही है। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय स्वदेशी विकल्पों को भी तेजी से तलाश रहा है।


