भारत-रूस सैन्य समझौता RELOS 12 जनवरी से लागू, एक दूसरे के ठिकानों पर तैनात रहेंगे 3000 सैनिक और 5 युद्धपोत

India News: भारत और रूस के बीच ‘पारस्परिक सैन्य रसद समझौता’ (RELOS) 12 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। रूस के आधिकारिक कानूनी पोर्टल पर जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई दे दी है। अब भारतीय नौसेना को आर्कटिक क्षेत्र और रूसी बंदरगाहों तक सीधी पहुंच मिल जाएगी। वहीं रूसी सेना हिंद महासागर में भारतीय सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकेगी। यह समझौता चीन के साथ बढ़ते सीमा विवाद के बीच भारत के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है।

RELOS के तहत क्या होगा? ये हैं डील की मुख्य शर्तें

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारत और रूस अब एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। समझौते की मुख्य शर्तों के अनुसार, एक समय में अधिकतम 3,000 सैनिक दूसरे देश की जमीन पर तैनात रह सकते हैं। पांच युद्धपोत एक-दूसरे के बंदरगाहों पर मौजूद रह सकते हैं। दस सैन्य विमान दूसरे देश के एयरबेस का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह समझौता शुरुआत में पांच साल के लिए किया गया है। दोनों देशों की आपसी सहमति से इसे अगले पांच साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। इस समझौते की नींव फरवरी 2025 में रखी गई थी और दिसंबर 2025 में रूस ने इसे कानूनी मंजूरी दी थी।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह समझौता भारत के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता है। रूस ने भारत को अपने सैन्य अड्डों तक पहुंच देकर एक मजबूत संदेश दिया है। इससे भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेंज बढ़ेगी। भविष्य में संयुक्त सैन्य अभ्यास और मानवीय सहायता अभियानों को नई दिशा मिलेगी। खासकर आर्कटिक क्षेत्र और हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी। चीन के साथ सीमा तनाव के बीच यह समझौता भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है। दोनों देशों की अटूट दोस्ती अब कागजों से निकलकर जमीन पर एक शक्तिशाली हकीकत बन गई है।

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