Karnataka News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लीगल स्टेटस और उनकी फंडिंग को लेकर देश में एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कर्नाटक के कद्दावर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस सिलसिले में सीधे संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र ने देश की राजनीति का पारा अचानक बढ़ा दिया है।
गृह मंत्री ने संघ से उनके कानूनी दर्जे, रजिस्ट्रेशन के कागजात, कमाई के मुख्य स्रोत और कुल खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है। खड़गे ने लिखा कि संघ देश का एक बहुत बड़ा संगठन है। इसकी देश भर में 60 हजार से ज्यादा शाखाएं एक्टिव हैं। इतना बड़ा ग्रुप कभी कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
प्रियांक खड़गे ने संघ की साल 2025-26 की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की सालाना रिपोर्ट के आंकड़ों का विशेष रूप से हवाला दिया। उन्होंने बताया कि अकेले कर्नाटक राज्य में संघ की 4,127 डेली शाखाएं लगती हैं। इसके अलावा राज्य में हर हफ्ते 1,389 साप्ताहिक मिलन के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
उन्होंने रिपोर्ट के जरिए दावा किया कि कर्नाटक में संघ 60 मासिक मंडलियां और करीब 2,194 बड़े समाजोत्सव आयोजित करता है। इन बड़े कार्यक्रमों में 19 लाख से अधिक लोग हिस्सा लेते हैं। राज्य में स्वयंसेवकों के 562 बड़े रूट मार्च होते हैं, जिसमें लाखों लोग फुल यूनिफॉर्म में कदमताल करते हैं।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने उठाए कई कड़े सवाल
गृह मंत्री ने कहा कि यह विशाल नेटवर्क राज्य में गहराई तक फैला हुआ है। यह सिस्टम रोजाना नया कैडर तैयार करता है। इतनी बड़ी मौजूदगी को कोई भी सरकार प्राइवेट या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं मान सकती। इस कारण संघ की लीगल पोजीशन, फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और टैक्स पेमेंट पर वाजिब सवाल उठते हैं।
उन्होंने अपने पत्र में पूछा कि संघ अब तक किसी सोसाइटी, ट्रस्ट या एनजीओ के रूप में रजिस्टर्ड क्यों नहीं है? संगठन के मुख्य पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों के नाम क्या हैं? देश और विदेश से मिलने वाले गुप्त चंदे और भारी आय का असली सोर्स क्या है?
पत्र में खड़गे ने यह भी पूछा कि क्या संघ अपनी बड़ी आय पर बनते हुए नियमों के मुताबिक टैक्स भर रहा है? बिना किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन के इतने बड़े लेवल पर ये सब गतिविधियां कैसे चल रही हैं? इतने बड़े रूट मार्च और पब्लिक प्रोग्राम के लिए लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से परमिशन कैसे मिलती है?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मांगों को किया खारिज
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इन सभी मांगों और सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है। केरल के एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ को किसी भी तरह के रजिस्ट्रेशन की कोई जरूरत नहीं है। संघ सरकार से कोई फंड या आर्थिक मदद नहीं लेता है।
भागवत ने कहा कि पिछले 100 साल से यह संगठन बिना किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन के लगातार काम कर रहा है। आज तक किसी भी पुरानी सरकार ने इस पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि हमारा हिंदू धर्म भी कहीं रजिस्टर्ड नहीं है। देश में कई अन्य बड़ी संस्थाएं भी ऐसे ही काम कर रही हैं।
संघ प्रमुख ने साफ कहा कि जो एनजीओ सरकार से आर्थिक मदद लेते हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। हम कोई सरकारी अनुदान नहीं लेते। उन्होंने 1960 के दशक का जिक्र करते हुए दावा किया कि संघ ने अपना लिखित संविधान तब सरकार को सौंपा था, जिसे मंजूर किया गया था।
उन्होंने इस पूरी बयानबाजी को कांग्रेस का एक राजनीतिक हथकंडा बताया। भागवत ने कहा कि विरोधी दल इस तरह के विवाद खड़े करके आम जनता के मन में केवल भ्रम फैलाना चाहते हैं। संघ औपचारिक रूप से एसोसिएशन ऑफ इंडिविजुअल्स के रूप में काम करता है और अदालतें भी इसे मानती हैं।
Reported By: Harikarishan Sharma


