Delhi News: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चौंकाने वाली रिपोर्ट वायरल हो रही है। आम धारणा थी कि अपशब्दों के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे आगे होंगे। हालांकि, एक नए देशव्यापी सर्वे ने इस पारंपरिक सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
इस ताजा रिसर्च के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली ने गालियों के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है। यहां की एक बड़ी आबादी रोजमर्रा की बातचीत में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करती है। यह हैरान करने वाला खुलासा एक लंबी स्टडी के बाद हुआ है।
रोहतक की यूनिवर्सिटी और फाउंडेशन ने मिलकर की बड़ी रिसर्च
यह विस्तृत स्टडी ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ और ‘महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी’ रोहतक ने की है। दोनों संस्थाओं ने मिलकर ‘गाली बंद घर’ अभियान के तहत यह सर्वे आयोजित किया था। यह व्यापक शोध कार्य साल 2014 से लेकर 2025 तक लगातार चलाया गया।
इस ग्यारह साल लंबी रिसर्च के दौरान पूरे देश के लगभग 70,000 लोगों से सीधे सवाल पूछे गए थे। इस सर्वे में छात्र, शिक्षक, डॉक्टर, ऑटो ड्राइवर, पुलिसकर्मी, बड़े व्यापारी और आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने अपनी भाषा को लेकर खुलकर जवाब दिए।
रिसर्च के नतीजों के मुताबिक दिल्ली के 80% लोग रोजाना अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। इस सूची में पंजाब 78% के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार 74% के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे हैं।
गाली इंडेक्स में राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र का हाल
स्टडी के अनुसार राजस्थान में 68%, हरियाणा में 62%, महाराष्ट्र में 58% और गुजरात में 55% लोग अपशब्द बोलते हैं। पूरे देश का औसत ‘गाली इंडेक्स’ 55% दर्ज किया गया है। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में यह आंकड़ा बहुत कम पाया गया है।
कश्मीर में सिर्फ 15% लोग ही अपशब्दों का प्रयोग करते हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी यह औसत 15 से 20 प्रतिशत के आसपास ही है। स्टडी में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि ज्यादातर गालियां सीधे तौर पर महिलाओं के खिलाफ केंद्रित हैं।
इन अपशब्दों में मुख्य रूप से मां, बहन और बेटी को टारगेट किया जाता है। सर्वे में शामिल 30% महिलाओं ने भी माना कि वे या तो खुद गालियां देती हैं या उन्हें मजबूरी में सहन करती हैं। अब गुस्से और मजाक में भी अभद्र भाषा आम हो चुकी है।
मेट्रो शहरों में क्यों बढ़ रहा है अपशब्दों का चलन?
दिल्ली के टॉप पर रहने का मुख्य कारण यहां की तेज रफ्तार जिंदगी और काम का भारी दबाव है। ट्रैफिक जाम और मानसिक तनाव के चलते लोग जल्दी आपा खो देते हैं। युवा पीढ़ी ने इसके लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म और वीडियो गेम्स को जिम्मेदार माना है।
दिल्ली के 80% लोगों ने स्वीकार किया कि वे बिना अपशब्द बोले सहज संवाद नहीं कर पाते हैं। पंजाब की बोलचाल और मर्दाना संस्कृति में भी गालियों का खुलकर इस्तेमाल होता है। हालांकि, दक्षिण भारत के राज्यों में अपनी सांस्कृतिक परंपरा के कारण मर्यादा बनी हुई है।
Author: Gaurav Malhotra

