New Delhi News: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ‘ऑपरेशन RAZEPILL’ के तहत देशव्यापी छापेमारी करते हुए 227.2 किलोग्राम खतरनाक कैप्टागॉन टैबलेट और पाउडर जब्त किया है। एनसीबी ने इस वैश्विक नार्को-आतंकवाद नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद भारत में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग विनिर्माण और तस्करी सिंडिकेट की कमर पूरी तरह टूट गई है।
देहरादून की सीक्रेट अवैध फैक्ट्री में अत्याधुनिक मशीनों से बनती थीं खतरनाक गोलियां
गिरफ्तार सीरियाई नागरिक से हुई कड़ी पूछताछ के बाद इस पूरे काले कारोबार का सनसनीखेज सच सामने आया है। आरोपी ने खुलासा किया कि नई दिल्ली के नेब सराय से बरामद कैप्टागॉन गोलियां उत्तराखंड के देहरादून की एक सीक्रेट फैक्ट्री में अवैध रूप से तैयार की जा रही थीं। इस इनपुट के आधार पर एनसीबी ने 16 मई 2026 की रात देहरादून स्थित ‘M/s Green Herbal’ नामक फैक्ट्री पर अचानक धावा बोल दिया।
प्रतिदिन 50 हजार रुपये किराया लेता था फैक्ट्री मालिक, आधुनिक मशीनें बरामद
देहरादून की इस फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां कैप्टागॉन टैबलेट बनाने, कैप्सूल भरने, कोटिंग, सीलिंग और ब्लिस्टर पैकेजिंग जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगी हुई थीं। एनसीबी ने वहां से भारी मात्रा में रसायनिक गाद, कच्चा माल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की है। जांच में पता चला है कि इस अवैध काम के लिए देश की धरती पर पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था।
ट्रामाडोल तस्करी का पुराना आरोपी है गिरफ्तार फैक्ट्री मालिक, कोर्ट में हुआ पेश
एनसीबी की जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस अवैध ड्रग्स के निर्माण के लिए देश का एक शातिर फार्मा बिजनेसमैन भी शामिल था। यह स्थानीय फैक्ट्री मालिक इस अवैध काम के लिए प्रतिदिन करीब 50 हजार रुपये का भारी-भरकम किराया वसूलता था। आरोपी मालिक पहले भी ट्रामाडोल और अन्य प्रतिबंधित दवाओं की अवैध सप्लाई के मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुका है।
इस्लामिक स्टेट के खूंखार लड़ाके हिंसक वारदातों को अंजाम देने के लिए करते हैं इस्तेमाल
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का ‘ऑपरेशन RAZEPILL’ अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है। पकड़ी गई कैप्टागॉन टैबलेट को दुनिया भर में ‘जिहादी पिल्स’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रतिबंधित और जानलेवा ड्रग का इस्तेमाल मुख्य रूप से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खूंखार लड़ाके और अन्य वैश्विक आतंकी संगठनों के आतंकवादी करते हैं, ताकि वे बिना किसी डर के बड़ी वारदातों को अंजाम दे सकें।
नशे की हालत में मिट जाता है दर्द का एहसास, और ज्यादा हिंसक हो जाते हैं आतंकी
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रतिबंधित जिहादी ड्रग को लेने के बाद इंसानी शरीर में दर्द का एहसास पूरी तरह खत्म हो जाता है। इसके सेवन के बाद आतंकियों का अपने होशो-हवास पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है। इस गहरे और जानलेवा नशे की हालत में आतंकवादी किसी भी हिंसक और आत्मघाती घटना को अंजाम देने के लिए तैयार हो जाते हैं। भारत में इस ड्रग की खेप मिलना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर ऊन के कबाड़ में छिपाकर रखी गई थी करोड़ों की खेप
एनसीबी की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट ने भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब बना लिया था। उत्तराखंड में तैयार होने के बाद इस ड्रग को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) भेजा गया था। मुंद्रा पोर्ट पर एक बड़े शिपिंग कंसाइनमेंट के अंदर शीप वूल (भेड़ की ऊन) के बीच इसे बेहद शातिर तरीके से छिपाकर रखा गया था।
मिडल ईस्ट और वेस्ट एशिया के देशों में सप्लाई होनी थी कैप्टागॉन की यह बड़ी खेप
जांच एजेंसियों के अनुसार भारत की सरजमीं पर तैयार की गई इस खतरनाक ड्रग की बड़ी खेप को समुद्री रास्ते से मिडल ईस्ट और वेस्ट एशिया के देशों में तस्करी के लिए भेजा जाना था। सीरियाई नागरिक ने इसके लिए भारत के कई राज्यों में अपना एक मजबूत स्थानीय नेटवर्क तैयार कर लिया था। हालांकि, गुजरात पोर्ट से शिपमेंट रवाना होने से पहले ही एनसीबी की मुस्तैदी ने इसे पकड़ लिया।
दिल्ली की स्वतंत्रता सेनानी कॉलोनी के एक सेफ हाउस से शुरू हुई थी पहली छापेमारी
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए एनसीबी ने देश के कई हिस्सों में एक साथ छापेमारी की थी। सबसे पहले दिल्ली की स्वतंत्रता सेनानी कॉलोनी में स्थित एक संदिग्ध सेफ हाउस पर छापा मारा गया था, जहां से जिहादी ड्रग्स की पहली खेप बरामद हुई थी। यहीं से मुख्य आरोपी सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद इस पूरे इंटरनेशनल सिंडिकेट के तार खुलते चले गए।
उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों में जारी है एनसीबी का महा-अभियान
जिहादी ड्रग्स के इस खतरनाक नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए एनसीबी की टीमें अब भी लगातार एक्शन मोड में हैं। वर्तमान समय में गुजरात, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में केंद्रीय जांच एजेंसियों की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑपरेशंस नीरज गुप्ता खुद इस पूरे ऑपरेशन की पल-पल की डिजिटल मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की एनसीबी और सहयोगी सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ
एनसीबी और अन्य सहयोगी खुफिया एजेंसियों के इस संयुक्त और साहसिक कृत्य की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऑपरेशन RAZEPILL’ की शानदार सफलता पर सुरक्षा बलों और एनसीबी की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेररिज्म नेटवर्क को भारत की धरती पर पनपने नहीं दिया जाएगा।

