Delhi News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति गंभीर संकट में है। इस महासंकट के बीच भारत के तेल भंडार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को ईंधन बचाने का एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
इस बड़ी वैश्विक मुसीबत की मुख्य जड़ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी भारी तनाव है। इस समुद्री मार्ग से भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 30 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। देश को अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 90 फीसदी तेल विदेशों से ही मंगाना पड़ता है।
भारत का कुल तेल स्टॉक और वर्तमान क्षमता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत को हर दिन 55 लाख बैरल कच्चे तेल की भारी आवश्यकता होती है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास कुल 74 दिनों का सुरक्षित तेल स्टॉक मौजूद है। इसमें रणनीतिक तेल भंडार का 9.5 दिनों का विशेष इमरजेंसी कोटा भी शामिल है।
तेल कंपनियां अपने स्तर पर अलग से लगभग 64.5 दिनों का व्यावसायिक स्टॉक सुरक्षित रखती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यूएई यात्रा के बाद इस राष्ट्रीय भंडार में भारी इजाफा होने की पूरी उम्मीद है। आबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ हुए नए समझौते से देश का स्टॉक बढ़ेगा।
इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौते के बाद भारत का कुल तेल भंडार लगभग 30 मिलियन बैरल तक पहुंच जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब 111 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। तेल कंपनियों को मई की शुरुआत में रोजाना 1000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
देश के प्रमुख रणनीतिक तेल भंडार केंद्र
सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ते भारी वित्तीय दबाव के कारण पिछले दिनों पेट्रोल-डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। भारत वर्तमान में मुख्य रूप से तीन भूमिगत केंद्रों में अपना आपातकालीन कच्चा तेल सुरक्षित रखता है। इन प्रमुख सुरक्षित ठिकानों में विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर शामिल हैं।
इन तीनों रणनीतिक केंद्रों की कुल संयुक्त भंडारण क्षमता वर्तमान में 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है। विशाखापत्तनम में 1.33 मीट्रिक टन, मंगलुरु में 1.5 मीट्रिक टन तेल जमा होता है। देश के सबसे बड़े पादुर भूमिगत केंद्र में 2.5 मीट्रिक टन कच्चा तेल सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था है।
केंद्र सरकार अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर नए कॉमर्शियल-कम स्ट्रेटेजिक रिजर्व विकसित कर रही है। ओडिशा के चांडीखोल में 4 मीट्रिक टन का नया रिजर्व बनेगा। इसके अलावा राजस्थान, मंगलुरु और मध्य प्रदेश के बीना में भी जमीन के ऊपर आधुनिक तेल भंडारण केंद्र बनाने की तैयारी है।
Author: Rajesh Kumar

