IAS अधिकारी का इस्तीफा 6 साल से लटका, अब कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहते हैं, सरकार पर उत्पीड़न का आरोप

AGMUT Cadre News: 2012 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी का इस्तीफा छह साल से अधिक समय से लंबित है। 2019 में कश्मीर में लगी पाबंदियों से नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है। अब वह कांग्रेस के टिकट पर केरल विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से अभी भी सेवारत अधिकारी माने जा रहे हैं। उन्होंने इस्तीफे को लटकाने को ‘उत्पीड़न’ करार दिया है।

छह साल से लंबित है इस्तीफा

सूत्रोंके मुताबिक, इस IAS अधिकारी के इस्तीफे पर अंतिम सिफारिश अब तक कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को नहीं भेजी गई है। DoPT ही IAS अधिकारियों के कैडर से जुड़े मामलों को देखता है। इसका मतलब है कि इस्तीफा अभी गृह मंत्रालय के पास ही लंबित है। हाल के वर्षों में इतनी लंबी देरी का कोई उदाहरण नहीं मिलता। 2025 में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।

इस्तीफा स्वीकार न होने की क्या वजह?

IAS,IPS और IFS (वन सेवा) के अधिकारियों के इस्तीफे की प्रक्रिया लगभग एक जैसी होती है। AGMUT कैडर के अधिकारी को अपना इस्तीफा गृह मंत्रालय को भेजना होता है। इसके बाद राज्य सरकार जांच करती है कि अधिकारी पर कोई मामला या जांच तो नहीं चल रही है। अगर ऐसा है, तो इस्तीफा रिजेक्ट हो सकता है। इसके बाद राज्य केंद्र को सुझाव भेजता है और फिर इस्तीफा DoPT के पास पहुंचता है। गौर करने वाली बात यह है कि DoPT के कैबिनेट मंत्री खुद प्रधानमंत्री होते हैं।

राजनीतिक भागीदारी पर उठ रहे सवाल

अखिल भारतीय सेवा(आचरण) नियमों के तहत, सेवारत अधिकारियों को राजनीतिक रूप से तटस्थ रहना अनिवार्य है। वे किसी राजनीतिक दल या गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते। चूंकि इस अधिकारी का इस्तीफा अभी लंबित है, इसलिए उनकी राजनीतिक भागीदारी कानूनी अस्पष्टता की स्थिति पैदा करती है। वह केरल विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ना चाहते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से अभी भी सेवारत अधिकारी हैं।

इस्तीफा स्वीकार करने की कोई समय सीमा नहीं

सबसेमहत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार किसी IAS अधिकारी का इस्तीफा कब तक स्वीकार करेगी, इसकी कोई तय समय सीमा नहीं है। हालांकि, 1988 के नियम के मुताबिक, जब अधिकारी सेवा नहीं देना चाहता, तो उसे बनाए रखना सरकार के हित में नहीं माना जाता। इस अधिकारी ने इस्तीफे को स्वीकार करने में हो रही देरी को ‘उत्पीड़न’ बताया है।

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