Himachal News: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक सेहत में पिछले तीन सालों में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में जो आंकड़े पेश किए हैं, वे राज्य की बढ़ती वित्तीय मजबूती की गवाही दे रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस साल जनवरी तक राज्य का कुल एसजीएसटी (SGST) संग्रह 16,169 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है। झंडूता के विधायक जे.आर. कटवाल और बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जामवाल के सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि कर अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण राजस्व का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है।
जीएसटी संग्रह में साल-दर-साल रिकॉर्ड उछाल
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो जीएसटी राजस्व में हर साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य ने 5,339.89 करोड़ रुपए का जीएसटी जमा किया था। इसके अगले ही साल यानी 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 5,816.61 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो केवल अप्रैल से जनवरी तक की दस महीनों की अवधि में ही सरकार 5,012.94 करोड़ रुपए बटोर चुकी है। यह साफ तौर पर राज्य की बाजार व्यवस्था में आ रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाता है।
उत्पाद शुल्क ने भी भरी सरकार की तिजोरी
जीएसटी के अलावा शराब और अन्य मदों से मिलने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Revenue) में भी बड़ी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य ने इस मद से 2,631.30 करोड़ रुपए की कमाई की, जो पिछले साल के मुकाबले 18.40 प्रतिशत ज्यादा थी। इसी तरह साल 2024-25 में उत्पाद शुल्क राजस्व 2,776.41 करोड़ रुपए रहा। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भी 19 मार्च तक सरकार 2,746.54 करोड़ रुपए जमा कर चुकी है। अभी इस साल के कुछ दिन बाकी हैं, जिससे यह आंकड़ा और ऊपर जाने की उम्मीद है।
बेहतर प्रबंधन से मजबूत हुई राज्य की अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन आंकड़ों के जरिए यह संदेश दिया है कि राज्य की वित्तीय नींव अब पहले से कहीं अधिक ठोस है। जीएसटी और उत्पाद शुल्क दोनों ही क्षेत्रों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने विकास कार्यों के लिए सरकार का हाथ मजबूत किया है। जानकारों का मानना है कि कर चोरी पर लगाम और पारदर्शी कर संग्रह प्रणाली की वजह से ही हिमाचल जैसे छोटे राज्य ने राजस्व संग्रह में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह पैसा अब राज्य की सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा।


