हिमाचल में वाहन मालिकों पर फूटा ‘ATS बम’, 16000 रुपये फीस और स्क्रैप का डर, भड़के लोग!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में खुला इकलौता ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन वाहन मालिकों के लिए सिरदर्द बन गया है। इस नई व्यवस्था के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं। राज्य सरकार भी अब लोगों के भारी दबाव में आ गई है। अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम ने केंद्र सरकार को तत्काल एक पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्रीय सचिव वी उमाशंकर से इस विवादित फैसले पर फिर से विचार करने की कड़ी अपील की है।

छह महीने तक पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने केंद्रीय सचिव से फोन पर भी लंबी बातचीत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था से आम जनता को भारी परेशानियां हो रही हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से कम से कम छह महीने तक पुरानी और नई दोनों व्यवस्थाएं एक साथ चलाने की पैरवी की है। इससे प्रदेश में एटीएस का पूरा नेटवर्क मजबूत करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। लोगों को इस दौरान वाहन पासिंग में कोई भारी दिक्कत नहीं होगी।

कांगड़ा जिले में एक स्टेशन से बिगड़े हालात

कांगड़ा भौगोलिक दृष्टि से राज्य का एक बहुत बड़ा जिला है। यहां केवल एक एटीएस के भरोसे पूरी व्यवस्था चलाना बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है। चार अप्रैल को केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में यह बात साफ तौर पर बताई गई है। एक ही स्टेशन होने से वाहन मालिकों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर करीब सोलह हजार रुपये की भारी भरकम राशि चुकानी पड़ रही है।

रोजाना 100 आवेदन और पास हो रहे सिर्फ 50 वाहन

इस टेस्टिंग स्टेशन पर वाहनों की पासिंग की रफ्तार बेहद धीमी है। यहां हर दिन सौ से ज्यादा वाहन पासिंग के लिए अपना नंबर लगाते हैं। लेकिन मुश्किल से केवल चालीस या पचास वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र मिल पाता है। बाकी वाहनों को बिना पासिंग के ही वापस लौटना पड़ता है। कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने भी इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा सत्र में उठाया था। उन्होंने भी धीमी पासिंग प्रक्रिया पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई थी।

यूनियनों ने दी चक्का जाम और हड़ताल की चेतावनी

अगर सरकार ने पुरानी मैनुअल पासिंग सुविधा बंद कर दी तो हालात बिगड़ जाएंगे। इसका सीधा असर उन गरीब लोगों पर पड़ेगा जिनकी रोजी रोटी वाहनों पर निर्भर है। फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने में हो रही देरी से पूरी परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। केंद्र सरकार के इस अचानक लिए गए फैसले से परिवहन यूनियनों में भारी गुस्सा भड़क गया है। कई संगठनों ने प्रदेश में चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की कड़ी चेतावनी दे दी है।

राज्य में खुलेंगे सात नए टेस्टिंग स्टेशन

राज्य सरकार ने वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए कुल सात स्टेशन मंजूर किए हैं। कांगड़ा के रानीताल स्थित गाहलियां में पहला निजी स्टेशन शुरू कर दिया गया है। ऊना के हरोली और हमीरपुर के नादौन में सरकारी क्षेत्र में स्टेशन खुलेंगे। मंडी, बिलासपुर, नालागढ़ और पावंटा साहिब में भी निजी क्षेत्र के स्टेशन स्थापित होंगे। केंद्र सरकार ने इस काम के लिए राज्य को छह करोड़ पचहत्तर लाख रुपये की भारी प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दी है।

दो बार फेल होने पर वाहन होगा कबाड़

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस पूरी नई व्यवस्था पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि केंद्र से सात जगहों पर स्टेशन स्थापित करने की पूरी मंजूरी मिल चुकी है। इन आधुनिक स्टेशनों में केवल पांच से दस मिनट में वाहन का पूरा परीक्षण हो जाएगा। सरकार ने एक नया सख्त नियम भी बनाया है। अगर कोई वाहन इस स्टेशन से लगातार दूसरी बार भी पास नहीं होता है, तो उसे कबाड़ घोषित कर दिया जाएगा।

खराब वाहनों से हो रहे सबसे ज्यादा सड़क हादसे

हिमाचल प्रदेश में वाहनों की संख्या में बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। राज्य में फिलहाल चौबीस लाख बयासी हजार से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इनमें करीब बाइस लाख निजी और तीन लाख व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। साल 2025 में प्रदेश में लगभग दो हजार सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन दर्दनाक हादसों में सात सौ नवासी लोगों की जान चली गई। सरकार का मानना है कि इन बढ़ती दुर्घटनाओं का मुख्य कारण अनफिट और बहुत खराब स्थिति वाले वाहन हैं।

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