Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इस वक्त एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अब अपने ही असंतुष्ट नेताओं से कड़ी चुनौती मिल रही है। पार्टी के कई पुराने और कद्दावर नेता लंबे समय से नाराज चल रहे हैं। इन नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर अपने राजनीतिक कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। अब ये बागी नेता प्रदेश में अपना अलग कुनबा तैयार कर रहे हैं। इससे हिमाचल में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। लाहुल स्पीति के पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने इसके लिए खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
बागी नेताओं ने शुरू की तीसरे मोर्चे की तैयारी
नाराज चल रहे दिग्गज नेताओं ने नई राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। ये नेता अपनी सोच वाले लोगों को एक मंच पर एकजुट कर रहे हैं। गुट में वो चेहरे शामिल हैं जिन्होंने अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था। या फिर जिन्होंने पार्टी के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद की थी। अब ये नेता पूरे प्रदेश में एक अलग संगठन बनाने की कोशिश में हैं। फिलहाल ये सभी नेता पंचायत चुनाव खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद वे अपनी इस राजनीतिक रणनीति को और आक्रामक रूप दे सकते हैं।
कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है पार्टी नेतृत्व?
इन बागी नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने में भाजपा फिलहाल उलझी हुई है। पार्टी आलाकमान सख्त कार्रवाई करने और नेताओं को मनाने के बीच संतुलन खोज रहा है। एक तरफ संगठन में अनुशासन बनाए रखना पार्टी के लिए बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ इन नेताओं का स्थानीय स्तर पर गहरा प्रभाव भी माना जाता है। यही बड़ा कारण है कि पार्टी अब तक किसी सख्त फैसले से बच रही है। शीर्ष नेतृत्व फिलहाल बंगाल सहित अन्य राज्यों के चुनावों में काफी व्यस्त है। इन चुनावों के बाद ही हिमाचल की स्थिति पर कोई बड़ी समीक्षा हो सकती है।
विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को जल्द कोई ठोस फैसला लेना होगा। पार्टी को तय करना होगा कि अनुशासन प्राथमिकता है या राजनीतिक संतुलन। अगर समय रहते इस गहरी नाराजगी को दूर नहीं किया गया, तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे। आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लाहुल स्पीति से पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय तीसरे मोर्चे के लिए बहुत सक्रिय हैं। वह मंडी, कुल्लू और हमीरपुर में तीसरे मोर्चे को लेकर लगातार कई अहम बैठकें कर चुके हैं।


