New Delhi News: पश्चिम एशिया के भारी तनाव ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। ऊर्जा संकट के कारण दुनिया के कई देशों में तेल का राशन बंट रहा है। भारत में भी रसोई गैस (LPG) का भारी संकट खड़ा हो गया है। इस बीच, देश में दोबारा लॉकडाउन लगने की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। प्रधानमंत्री ने हालात से निपटने के लिए कोविड जैसी तैयारी का जिक्र किया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ी सबसे बड़ी मार
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार की सबसे अहम कड़ी है। इसके बंद होने से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। माल ढुलाई महंगी होने से राशन और जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। सबसे बड़ा खतरा खाद की सप्लाई रुकने से पैदा हुआ है। इससे आने वाले समय में दुनिया भर में भारी खाद्य संकट आ सकता है।
पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और राशनिंग शुरू
ऊर्जा की कमी से जूझ रहे कई देशों ने सख्त कदम उठाए हैं। जापान और दक्षिण कोरिया में लोगों को ऊर्जा वाउचर दिए जा रहे हैं। वहां ईंधन की राशनिंग लागू कर दी गई है। श्रीलंका, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे एशियाई देशों में हालात और भी खराब हैं। वहां पेट्रोल पंपों पर कई किलोमीटर लंबी लाइनें लग रही हैं। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भी अपने नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोग केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही यात्रा करें।
भारत में रसोई गैस का भारी संकट
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 फीसदी तेल इसी रास्ते से मंगाता है। सप्लाई रुकने से देश के कई हिस्सों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत हो गई है। गैस कंपनियों ने नए कनेक्शन देने बंद कर दिए हैं। कई शहरों में लोग एक सिलेंडर के लिए हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश को कोविड-काल जैसी तैयारी और समन्वय दिखाना होगा। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि अभी पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सुचारू है।
क्या देश में फिर से लगेगा लॉकडाउन?
इंटरनेट पर अचानक ‘भारत में लॉकडाउन’ की खोज काफी बढ़ गई है। 24 मार्च 2020 की कड़वी यादों ने लोगों को डरा दिया है। विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक पुरानी याद और अनिश्चितता का डर मान रहे हैं। सरकार ने भी साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के लॉकडाउन की कोई योजना नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान सप्लाई को बनाए रखने और ऊर्जा बचाने पर है। इसके लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टीम ऊर्जा और खाने-पीने की चीजों की निगरानी कर रही है। ईंधन बचाने के लिए गैर-जरूरी उद्योगों की गैस सप्लाई भी काटी जा रही है।


