इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज ‘आर-पार’, बीमार पिता से मिलने की गुहार या एनआईए का कड़ा पहरा?

Delhi News: टेरर फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद की किस्मत का फैसला आज दिल्ली हाई कोर्ट में होगा। अदालत दोपहर 2:30 बजे उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी। राशिद ने अपने बीमार पिता से मिलने के लिए मानवीय आधार पर रिहाई की मांग की है। इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि क्या सांसद को राहत मिलेगी।

एनआईए ने किया जमानत का पुरजोर विरोध

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सांसद राशिद की जमानत याचिका का कोर्ट में कड़ा विरोध किया है। एनआईए के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि मामले का एक महत्वपूर्ण गवाह अपने बयान से पलट गया है। एजेंसी ने इसे गंभीर बताते हुए जमानत न देने की मांग की। एनआईए ने गोपनीय दस्तावेज पेश करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय भी मांगा है। जांच एजेंसी का मानना है कि राशिद की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है।

पिता की गंभीर हालत का दिया हवाला

इंजीनियर राशिद के वकील हरिहरन ने अदालत में भावुक अपील करते हुए मानवीय आधार पर जमानत मांगी। उन्होंने बताया कि राशिद के पिता काफी बुजुर्ग हैं और उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। वे वर्तमान में अस्पताल में भर्ती हैं और अपने जीवन के अंतिम दौर से गुजर रहे हैं। वकील ने तर्क दिया कि एक बेटे को अपने मरणासन्न पिता की सेवा करने का हक मिलना चाहिए। उन्होंने इसे एक बुनियादी मानवीय अधिकार बताया।

वकील ने एनआईए की मंशा पर उठाए सवाल

सांसद के बचाव पक्ष ने एनआईए के दोहरे रवैये पर भी सवाल खड़े किए। वकील हरिहरन ने कहा कि जब राशिद को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए बाहर भेजा गया था, तब एनआईए को कोई आपत्ति नहीं थी। अब जब वे अपने बीमार पिता से मिलने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मांग रहे हैं, तो एजेंसी विरोध क्यों कर रही है। बचाव पक्ष ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए जल्द राहत देने की अपील की है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

इंजीनियर राशिद ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी दलीलों को पर्याप्त नहीं माना था। अब हाई कोर्ट में एनआईए द्वारा पेश किए जाने वाले गोपनीय दस्तावेजों और गवाहों के बयानों पर चर्चा होगी। दोपहर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच अदालत किसे प्राथमिकता देती है। सांसद के समर्थक इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

सुरक्षा और जांच के बीच फंसा मामला

यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक जटिल कानूनी लड़ाई बन गया है। एक तरफ जहां गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर एक बेटे की अपने पिता के प्रति जिम्मेदारी है। हाई कोर्ट को आज यह तय करना है कि क्या कड़ी शर्तों के साथ राशिद को अस्पताल जाने की अनुमति दी जा सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश राज्य की राजनीति और न्यायिक नजीर के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories