Mumbai News: ईरान युद्ध के चलते वैश्विक बाजारों में मचे घमासान का सीधा असर अब भारतीय आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। ईंधन, दूध और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी से देश में खुदरा महंगाई तेजी से बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में देश की खुदरा महंगाई में 0.42% तक का बड़ा उछाल देखा जा सकता है। सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में किए गए ताजा संशोधन के बाद से ही बाजार में चौतरफा महंगाई का एक नया दौर शुरू हो गया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सरकार ने किया बड़ा इजाफा
केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इस ताजा संशोधन के बाद देश में पेट्रोल की दरें 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये पर पहुंच गई हैं। वहीं दूसरी तरफ डीजल की दरें भी उछलकर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।
ईंधन की कीमतों में हुई इस वृद्धि का सीधा असर देश की लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत पर पड़ा है। ईंधन महंगा होने की वजह से देश के प्रमुख डेयरी ब्रांड अमूल और मदर डेयरी ने भी अपने ताजा दूध की कीमतों में तुरंत 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
नाश्ता भी हुआ महंगा, ब्रेड के दाम 5 रुपये तक बढ़े
महंगाई की यह मार सिर्फ दूध और ईंधन तक ही सीमित नहीं है। मुंबई और उसके आस-पास के सभी रिहायशी इलाकों में प्रमुख ब्रेड कंपनी मॉडर्न ब्रेड ने अपने कई ब्रेड वेरिएंट की कीमतों में 5 रुपये प्रति पैकेट तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे सुबह का नाश्ता भी महंगा हो गया है।
देश के बड़े आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार इन प्रमुख वस्तुओं के दामों में हुई हालिया वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों ने परिवहन और खाद्य लागतों के माध्यम से व्यापक दूसरे दौर के प्रभावों को लेकर आम जनता और सरकार को आगाह किया है।
मई-जून में दिखेगा महंगाई का सबसे खतरनाक असर
इंडिया रेटिंग्स और रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा के मुताबिक पेट्रोल, डीजल और दूध की कीमतों का यह संयुक्त प्रभाव सीपीआई महंगाई को लगभग 0.42 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। हालांकि मई 2026 के चालू महीने में यह तात्कालिक प्रभाव करीब 0.20 प्रतिशत के आसपास देखा जा सकता है।
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने बताया कि सीपीआई बास्केट में ईंधन का वजन देखते हुए इस बढ़ोतरी से शीर्ष महंगाई 0.25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मई-जून 2026 में खुदरा महंगाई पर तत्काल असर 15-20 बीपीएस के आसपास रहेगा।
Author: Rajesh Kumar


