सीबीएसई अधिकारियों पर गिरेगी गाज! टेंडर घोटाले और डिजिटल चेकिंग में गड़बड़ी पर शिक्षा मंत्रालय सख्त

New Delhi News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जल्द ही बहुत बड़ा एक्शन होने वाला है। शिक्षा मंत्रालय ने बोर्ड की एक विवादित टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम में सामने आई गंभीर कमियों को लेकर एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, बोर्ड के ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर सीबीएसई से एक बेहद विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों के मुताबिक अब तक बोर्ड द्वारा दी गई सफाई से मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए हैं।

इस पूरे मामले को लेकर अब बोर्ड के भीतर कई बड़े स्तरों पर जवाबदेही तय किए जाने की पूरी संभावना बन गई है। शिक्षा मंत्रालय के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय उन सभी लोगों के खिलाफ बहुत कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर रहा है।

हैदराबाद की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी। सूत्रों ने आगे यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में प्रक्रियागत चूक या लापरवाही साबित होती है, तो दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना बिल्कुल तय है। इस टेंडर से जुड़ा विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया था।

आरोप है कि बोली के कई दौरों के दौरान पात्रता की जरूरी शर्तें और महत्वपूर्ण तकनीकी मानदंडों को बार-बार बदला गया था। इन तमाम बदलावों के बाद आखिरकार हैदराबाद में स्थित एक निजी कंपनी ‘कोएम्प्ट एडु टेक’ (Coempt Edu Tek) इस टेंडर में सफल बोलीदाता के रूप में सामने आई थी।

देश के तमाम आलोचकों और प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि क्या किसी एक खास कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी खरीद के कड़े नियमों में जानबूझकर ढील दी गई थी? यह सवाल अब तेजी से गूंज रहा है।

सवालों के घेरे में डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम

यह विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब बोर्ड की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान छात्रों की धुंधली उत्तर पुस्तकाएं, गायब पन्ने और कई बड़ी तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगी थीं। हालांकि सीबीएसई ने अपने ऊपर लगे इन सभी गलत कामों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

बोर्ड का कहना है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया सामान्य वित्तीय नियमों और खरीद की स्थापित वैध प्रक्रियाओं के अनुसार ही पूरी की गई थी। लेकिन यह विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया जब देश के कुछ एथिकल हैकर्स और स्वतंत्र डेवलपर्स ने बोर्ड के पूरे डिजिटल मूल्यांकन ढांचे की कमियों को उजागर कर दिया।

Author: Gaurav Malhotra

Hot this week

Shimla Secretariat News: नए सीएम कार्यालय के लिए सचिवालय में बड़ा बदलाव, अस्थायी दफ्तर से चलेगा कामकाज

Shimla News: हिमाचल प्रदेश सचिवालय में मुख्यमंत्री कार्यालय के...

Related Articles

Popular Categories