Delhi News: विमानन कंपनी स्पाइसजेट की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। जीएसटी विभाग ने कंपनी पर 124.65 करोड़ रुपये की कथित कर देनदारी का आकलन करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने कंपनी से यह भी पूछा है कि लगातार नियमों के उल्लंघन के बीच उसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन क्यों न रद्द किया जाए।
जीएसटी विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
मिली जानकारी के अनुसार, स्पाइसजेट कई महीनों से जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर सकी है। इसी आधार पर विभाग ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत कंपनी की कर देनदारी का अस्थायी आकलन किया है। 25 मई 2026 को जारी नोटिस में विस्तृत जवाब मांगा गया है।
विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक नवंबर 2025 के लिए 44.44 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 के लिए 43.79 करोड़ रुपये, जनवरी 2026 के लिए 12.19 करोड़ रुपये, फरवरी 2026 के लिए 12.10 करोड़ रुपये और मार्च 2026 के लिए 12.12 करोड़ रुपये की कर मांग निर्धारित की गई है। इन सभी अवधियों को मिलाकर कुल देनदारी 124.65 करोड़ रुपये बैठती है।
सूत्रों के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद भी संबंधित अवधि के लंबित जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किए गए हैं। ऐसे में विभाग आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो कंपनी को अतिरिक्त नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
शेयर बाजार में दिख सकती है निवेशकों की चिंता
इस घटनाक्रम का असर स्पाइसजेट के शेयर पर भी पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारी सप्ताह शुरू होने पर निवेशकों की प्रतिक्रिया सतर्क रह सकती है। शुक्रवार को बीएसई पर कंपनी का शेयर 12.75 रुपये पर बंद हुआ था। वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर करीब 60 प्रतिशत टूट चुका है।
पिछले एक वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी के शेयर में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार वित्तीय दबाव, बढ़ती देनदारियां और नियामकीय चुनौतियां निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं। इसी वजह से बाजार की नजर अब कंपनी की अगली रणनीति और विभाग को दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हुई है।
घाटे के बीच बढ़ी परिचालन आय
स्पाइसजेट की वित्तीय स्थिति भी फिलहाल दबाव में बनी हुई है। दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी को 261.38 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध घाटा हुआ था। इससे एक वर्ष पहले की समान अवधि में एयरलाइन लाभ में थी। हालांकि कंपनी की परिचालन आय में सुधार देखने को मिला और यह 1,237 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
Author: Rajesh Kumar

