Badrinath Dham: कचरे से हो रही लाखों की कमाई! चारधाम यात्रा के पहले हफ्ते में ही नगर पंचायत ने रचा इतिहास

Badrinath News: चारधाम यात्रा के आगाज के साथ ही भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन का एक बेहतरीन मॉडल उभर कर सामने आया है। यात्रा शुरू होने के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही प्रशासन ने करीब आठ टन अजैविक कचरे का सुरक्षित निस्तारण करने में सफलता हासिल की है। खास बात यह है कि इस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से नगर पंचायत को केवल सात दिनों में 84 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई है। यह पहल न केवल पर्यावरण को बचाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि आर्थिक रूप से भी पंचायत को सशक्त बना रही है।

कचरा प्रबंधन की पुख्ता और वैज्ञानिक व्यवस्था

बदरीनाथ धाम की स्वच्छता का पूरा जिम्मा नगर पंचायत के पास है, जो पैदल मार्गों से लेकर मुख्य मंदिर परिसर तक सफाई सुनिश्चित करती है। नगर पंचायत ने कूड़ा प्रबंधन के लिए एक ठोस तंत्र विकसित किया है, जिसके तहत जैविक और अजैविक कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग कर लिया जाता है। इस कचरे को वैज्ञानिक विधि से प्रोसेस किया जा रहा है ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे। बीते पूरे वर्ष में जहां 230 टन कचरा निस्तारित हुआ था, वहीं इस साल की शुरुआती गति ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

कूड़े से खाद और प्लास्टिक से बन रहे ‘ब्लॉक’

नगर पंचायत की इस मुहिम में पर्यावरण मित्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। एकत्रित किए गए जैविक कचरे से उन्नत किस्म की खाद तैयार की जा रही है, जिसका उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जाता है। वहीं, पर्यावरण के लिए सबसे घातक माने जाने वाले प्लास्टिक कचरे को कंप्रेस कर ‘ब्लॉक’ में परिवर्तित किया जा रहा है। इन तैयार किए गए ब्लॉक्स का बाजार में विपणन किया जा रहा है, जिससे पंचायत को अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है। इस ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) तकनीक ने धाम में स्वच्छता के मायने बदल दिए हैं।

संसाधनों के विकास में खर्च होगी अर्जित राशि

नगर पंचायत द्वारा कचरे की बिक्री से जो आय अर्जित की जा रही है, उसे पुनः स्वच्छता अभियान में ही निवेश किया जाएगा। इस राशि का उपयोग सफाई कर्मचारियों के लिए बेहतर उपकरणों की खरीद, आधुनिक कूड़ा निस्तारण मशीनों के रखरखाव और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह मॉडल इसी तरह काम करता रहा, तो नगर पंचायत जल्द ही कचरा प्रबंधन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगी। इससे बदरीनाथ की पवित्रता और स्वच्छता दोनों बरकरार रहेंगी।

अन्य पालिकाओं के लिए प्रेरणा बना बदरीनाथ मॉडल

बदरीनाथ धाम में अपनाई जा रही यह अनूठी कार्यप्रणाली अब चमोली जनपद की अन्य नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। यात्रा सीजन के दौरान कचरे का अंबार एक बड़ी चुनौती होता है, लेकिन बदरीनाथ ने इसे अवसर में बदल दिया है। जिला प्रशासन अब इस सफल मॉडल को केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे अन्य धामों में भी प्रभावी ढंग से लागू करने पर विचार कर रहा है। स्वच्छता और कमाई का यह मेल उत्तराखंड के पर्यटन को एक नई और सकारात्मक दिशा दे रहा है।
बदरीनाथ धाम में कचरा प्रबंधन की इस पहल को लेकर आप क्या सोचते हैं?

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