Lifestyle News: घर, बालकनी और गार्डन की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए लोग अक्सर अपने घरों में गुलाब के पौधों को लगाना बेहद पसंद करते हैं। इसके पौधों में खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल हर किसी का मन मोह लेते हैं और पूरे वातावरण को अपनी खुशबू से महका देते हैं।
कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनका गुलाब का पौधा तो अच्छी तरह बढ़ रहा है, लेकिन उसमें कलियां और फूल बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों को सही समय पर उचित पोषण न मिलने की वजह से अक्सर ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
रासायनिक खाद के बजाय अपनाएं घरेलू नुस्खा
गुलाब के पौधों में फूलों की संख्या बढ़ाने के लिए महंगे रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इसकी जगह आप अपने किचन में बची हुई चायपत्ती का बेहतरीन ऑर्गेनिक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पौधों के लिए रामबाण का काम करती है।
अक्सर हम सभी घरों में सुबह-शाम चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती को बेकार कचरा समझकर सिंक या डस्टबिन में फेंक देते हैं। लेकिन, गार्डनिंग के शौकीन लोग इसका सही इस्तेमाल करके अपने पौधों की मिट्टी की उर्वरता को कई गुना तक आसानी से बढ़ा सकते हैं।
चायपत्ती में होते हैं कई जरूरी पोषक तत्व
चायपत्ती के अंदर प्राकृतिक रूप से कई ऐसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पौधों की जड़ों के विकास के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। इसका बिल्कुल सही और संतुलित तरीके से इस्तेमाल आपके बेजान पड़े गुलाब के पौधे को भी हरी-भरी कलियों से भर सकता है।
किचन से निकलने वाली बची हुई चायपत्ती को सीधे पौधों में डालने की गलती कभी न करें। इसे खाद के रूप में तैयार करने की एक बेहद आसान और प्रभावी विधि है। इसके लिए सबसे पहले इस्तेमाल की गई चायपत्ती को साफ पानी से कम से कम दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें।
धोना और सुखाना है सबसे ज्यादा जरूरी
चायपत्ती को अच्छी तरह धोना इसलिए जरूरी है ताकि उसमें मौजूद चीनी और दूध का अंश पूरी तरह से बाहर निकल जाए। यदि चीनी मिट्टी में चली गई, तो पौधे में चींटियां और फंगस लगने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। धोने के बाद इसे कड़क धूप में सुखाएं।
जब धोई गई चायपत्ती धूप में पूरी तरह से सूख जाए, तो इसे एक साफ और सूखे जार में भरकर रख लें। अब अपने गुलाब के गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। इसके बाद लगभग दो छोटे चम्मच सूखी हुई चायपत्ती को चारों तरफ की मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
15 से 20 दिनों के अंतराल पर करें इस्तेमाल
पौधों में इस प्राकृतिक ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल आप हर 15 से 20 दिनों के अंतराल पर नियमित रूप से कर सकते हैं। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य ऑर्गेनिक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, जिससे पौधे की ग्रोथ तेजी से होती है और कलियां खिलने लगती हैं।
आप चाहें तो इस सूखी चायपत्ती से बेहतरीन कंपोस्ट भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए चायपत्ती को अन्य जैविक कचरे, जैसे सूखे पत्ते, सब्जियों और फलों के छिलकों के साथ मिलाकर कुछ दिनों के लिए छोड़ दें। यह खाद मिट्टी को बहुत अधिक उपजाऊ और भुरभुरी बनाती है।
ज्यादा मात्रा डालने से हो सकता है नुकसान
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार, चायपत्ती का इस्तेमाल हमेशा एक सीमित और संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। मिट्टी में इसकी बहुत अधिक मात्रा डालने से मिट्टी का पीएच स्तर बिगड़ सकता है और उसकी बनावट प्रभावित हो सकती है, जो पौधों को सुखा भी सकती है।
बची हुई चायपत्ती का बिल्कुल सही तरीका और सही अनुपात आपके पौधों की सेहत को तेजी से सुधार सकता है। इस आसान और मुफ्त के घरेलू उपाय को अपनाकर आप अपने घर की बालकनी में लगे गुलाब के पौधों को हमेशा हरा-भरा और फूलों से लदा हुआ रख सकते हैं।
Author: Karuna Sen


