AAP में सबसे बड़ी बगावत: अब तक केजरीवाल के 7 दिग्गज सांसद BJP में हुए शामिल, दिल्ली से पंजाब तक मची खलबली

Delhi News: आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा के सात सांसदों ने एक साथ बगावत करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। इनमें राघव चड्ढा, हरभजन सिंह और संदीप पाठक जैसे कद्दावर नेता शामिल हैं। दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद यह घटना अरविंद केजरीवाल के लिए एक गहरा संकट है। आम आदमी पार्टी ने इन बागी नेताओं को पंजाब का गद्दार करार दिया है।

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किया बड़ा ऐलान

राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने पार्टी में हुई इस टूट की आधिकारिक घोषणा करके सबको चौंका दिया। चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ कुल सात सांसद खड़े हैं। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को इस संबंध में अपना पत्र सौंप दिया है। चड्ढा ने यह भी बताया कि इन दिग्गज नेताओं के अलावा कई अन्य लोग भी उनके लगातार संपर्क में बने हुए हैं।

संदीप पाठक और अशोक मित्तल के कदम ने बढ़ाई हैरानी

इस बड़ी बगावत में संदीप पाठक और अशोक मित्तल का नाम सबसे अधिक चौंकाने वाला है। संदीप पाठक को हमेशा अरविंद केजरीवाल का बेहद खास रणनीतिकार माना जाता था। वह पार्टी की महत्वपूर्ण योजनाओं का नेतृत्व कर रहे थे। अशोक मित्तल को हाल ही में चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर की अहम जिम्मेदारी मिली थी। केजरीवाल को इन दोनों प्रमुख नेताओं से इस तरह के कदम की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।

संजय सिंह ने जताई निराशा और याद दिलाए पुराने दिन

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस टूट पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम उनके लिए बेहद दुखद और व्यथित करने वाला है। संजय सिंह ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को पंजाब का गद्दार कहकर संबोधित किया। उन्होंने याद दिलाया कि केजरीवाल ने इन लोगों पर पूरा भरोसा जताया था। उन्होंने अशोक मित्तल के ठिकानों पर हुई हालिया ईडी छापेमारी का भी विशेष जिक्र किया।

इन तीन सांसदों की बगावत का पहले से था पक्का अनुमान

जिन सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है, उनमें तीन नेताओं की बगावत का पहले से अनुमान था। राघव चड्ढा और पार्टी के बीच का मनमुटाव काफी समय से सार्वजनिक हो चुका था। इसी महीने उन्हें डिप्टी लीडर पद से हटाया गया था। क्रिकेटर हरभजन सिंह भी लंबे समय से पार्टी गतिविधियों पर पूरी तरह चुप थे। वहीं, स्वाति मालीवाल की पुरानी बगावत की कहानी से सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ थे।

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