World/International News: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यहां इबोला वायरस के एक बेहद दुर्लभ और घातक स्ट्रेन ने तबाही मचा रखी है। इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने से एक अमेरिकी डॉक्टर भी बुरी तरह संक्रमित हो गया है।
यह जानलेवा प्रकोप अब पूरे कांगो सहित पड़ोसी देश युगांडा में भी बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार को इस भयावह प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया है।
दर्ज की गईं 118 मौतें और सैकड़ों संदिग्ध मामले
कांगो के इटुरी और नॉर्थ किवु प्रांतों में अब तक इबोला के 300 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 118 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, युगांडा ने भी इस जानलेवा वायरस से जुड़ी दो मौतों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
कांगो के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-मेडिकल रिसर्च के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. जीन-जैक्स मुयेम्बे ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में दर्ज किए गए मामलों में ही अमेरिकी डॉक्टर के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।
गलत स्ट्रेन की जांच के कारण हफ्तों तक फैलता रहा वायरस
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि यह वायरस हफ्तों तक बिना किसी की नजर में आए चुपचाप फैलता रहा। इसका मुख्य कारण यह था कि शुरुआती चिकित्सा जांच में इबोला के गलत स्ट्रेन की तलाश की जा रही थी, जिससे फॉल्स नेगेटिव नतीजे मिले।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ मैथ्यू एम. कवानाघ ने कहा कि गलत जांच के कारण हमने वायरस के खिलाफ प्रतिक्रिया देने के जरूरी हफ्ते गंवा दिए। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन द्वारा डब्ल्यूएचओ से हटने और विदेशी सहायता राशि की फंडिंग में की गई कटौती की भी कड़ी आलोचना की।
जानें क्या है इबोला का यह दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन?
मौजूदा समय में फैल रहा बुंडिबुग्यो वायरस, इबोला का एक बहुत ही दुर्लभ और खतरनाक प्रकार है। साल 1976 के बाद से कांगो और युगांडा में इबोला के 20 से ज्यादा प्रकोप फैले हैं, लेकिन यह केवल तीसरी बार है जब बुंडिबुग्यो स्ट्रेन मिला है।
यह वायरस अत्यधिक संक्रामक है जो शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून और उल्टी के जरिए फैलता है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, दस्त और शरीर से खून बहना शामिल हैं। इस समय इस स्ट्रेन का कोई मंजूर टीका उपलब्ध नहीं है।
Author: Pallavi Sharma

